अम्बेडकरनगर। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर विकासखंड जलालपुर की 12 ग्राम पंचायतों में नारी संघों ने बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया। कार्यक्रम का आयोजन जनशिक्षण केंद्र द्वारा संचालित ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम के तहत किया गया।
अभियान की शुरुआत “रोटी, खेल, पढ़ाई, प्यार-हर बच्चे का है अधिकार” जैसे नारों के साथ हुई। महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया। इस दौरान लोगों को बताया गया कि बच्चों का स्थान कार्यस्थलों पर नहीं, बल्कि विद्यालयों, खेल के मैदानों और सुरक्षित पारिवारिक वातावरण में है।
बाल श्रम को बताया गंभीर सामाजिक चुनौती
कार्यक्रम समन्वयक हेमलता ने कहा कि बाल मजदूरी बच्चों के बचपन, शिक्षा और भविष्य को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि आज भी कई बच्चे दुकानों, ढाबों और अन्य कार्यस्थलों पर काम करते दिखाई देते हैं, जिसे रोकने के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रयास जरूरी हैं।
कानूनों की दी जानकारी
कार्यक्रम में प्रतिभागियों को बाल श्रम से जुड़े कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि संविधान का अनुच्छेद 24, 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को खतरनाक कार्यों में नियोजित करने पर रोक लगाता है। वहीं बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।









