
- मेट्रो प्रोजेक्ट ने छीना खेल मैदान, कॉलेज प्रशासन नाराज़
- कॉलेज की जमीन पर कब्ज़ा या प्रशासनिक चूक?
- 100 करोड़ की संपत्ति पर मेट्रो का निर्माण, मुआवजा अब तक नहीं
आगरा। आगरा कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. चित्र कुमार गौतम ने उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) पर कॉलेज की कीमती जमीन गलत तरीके से हथियाने का आरोप लगाया है। प्रिंसिपल ने दावा किया कि मेट्रो ने कॉलेज का खेल मैदान और भगत सिंह छात्रावास परिसर की जमीन अधिग्रहण कर ली, जिसकी कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन कॉलेज को अब तक मुआवजा नहीं मिला है।
दस्तावेजों में खसरा नंबर छिपाया
प्रेसवार्ता में डॉ. गौतम ने कहा कि मेट्रो प्राधिकरण ने कभी भी अधिग्रहित जमीन का वास्तविक खसरा नंबर (255) और रकबा (70,278 वर्ग गज) दस्तावेजों में नहीं बताया। उन्होंने कहा कि यह जमीन 1901 से ही आगरा कॉलेज के ट्रस्ट के अधीन है और सभी कर समय पर भरे जाते रहे हैं।
तीन दिन में नहीं सुनी गई शिकायत तो रुकवा देंगे काम
प्रिंसिपल ने मेट्रो अधिकारियों को 3 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर मामले का निस्तारण नहीं हुआ तो कॉलेज प्रशासन मेट्रो निर्माण कार्य रुकवा देगा। उन्होंने कहा, “100 करोड़ से अधिक की जमीन ले ली गई, लेकिन एक रुपया भी मुआवजा नहीं दिया गया। इससे कॉलेज के विकास कार्य प्रभावित हुए हैं।”
पृष्ठभूमि
- आगरा कॉलेज की स्थापना 1823 में हुई थी और यह उत्तर भारत के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक है।
- 1901 में ब्रिटिश सरकार ने कॉलेज की संपत्ति (भवन, जमीन, छात्रावास, खेल मैदान) एक ट्रस्ट को सौंपी थी।
- मेट्रो कॉरपोरेशन ने एमजी रोड पर मेट्रो विस्तार के लिए इस जमीन का अधिग्रहण किया है।
अभी तक यूपीएमआरसी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।








