
- जलालपुर तहसील प्रशासन ने झूठे आरोपों का खंडन किया, सोशल मीडिया पर फैलाए गए भ्रम के खिलाफ उठाए गए कदम
- हसील जलालपुर प्रशासन ने रिश्वतखोरी के आरोपों को किया नकारा, झूठे ट्वीट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग
- तहसील जलालपुर प्रशासन ने रिश्वतखोरी के आरोपों को असत्य बताया, सोशल मीडिया पर फैलाए गए भ्रामक आरोपों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
अम्बेडकरनगर । सोशल मीडिया पर एक बार फिर झूठी अफवाहों का खेल सामने आया है। तहसील जलालपुर के तहसीलदार और अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाते हुए एक ट्वीट वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया गया था कि खेत को सड़क बताने के बावजूद एडीएम ने चार लाख रुपये की रिश्वत के बिना रजिस्ट्री करने से इंकार कर दिया।
हालांकि, तहसील प्रशासन ने इस आरोप को पूरी तरह से असत्य, भ्रामक और आधारहीन करार दिया। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि यूपीडा से संबंधित बैनामों के लिए नामित अधिकारी तहसीलदार नहीं, बल्कि नायब तहसीलदार (भियांव) होते हैं। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) केवल मार्गदर्शन का कार्य करते हैं, और सोशल मीडिया पर इस तथ्य को नजरअंदाज करते हुए भ्रम फैलाने की कोशिश की गई।
तहसील प्रशासन ने इस झूठे ट्वीट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए थाना जलालपुर को पत्र भेजा है। प्रशासन ने ट्वीट करने वाले वरूण शुक्ला पर प्रशासन की छवि धूमिल करने का गंभीर आरोप भी लगाया है।








