जामिया पहुंचेंगे राहुल गांधी, भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से करेंगे मुलाकात

करीब 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव कराने का आदेश, लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े छात्र

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी बुधवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय पहुंचेंगे। यहां वह छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात करेंगे। विश्वविद्यालय में दो छात्र 12 अक्तूबर से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इससे पहले पांच छात्र 16 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे थे। सोमवार को चुनाव कराने की घोषणा के बाद इनमें से तीन छात्रों ने अनशन समाप्त कर दिया था।

करीब 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव का ऐलान

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में करीब दो दशक बाद छात्रसंघ चुनाव कराने का आदेश जारी किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को घोषणा की कि छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी निलंबन आदेश और कारण बताओ नोटिस रद्द करने का भी फैसला लिया है।

इसके अलावा आंदोलन के दौरान सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार की जांच के लिए समिति गठित करने का आश्वासन दिया गया है। प्रशासन के इन फैसलों के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया है।

लिखित आश्वासन मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन

जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के मुताबिक, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी सोमवार सुबह करीब 4:30 बजे परिसर पहुंचे थे। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की और प्रशासन का आदेश साझा करते हुए आंदोलन समाप्त करने की अपील की। रजिस्ट्रार ने कहा कि छात्रों की मांगें मान ली गई हैं।

हालांकि, छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी देने की तारीख स्पष्ट नहीं की गई है। उन्होंने चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग पर भी जवाब मांगा है। छात्रों के मुताबिक, जब तक प्रशासन स्पष्ट समयसीमा के साथ लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदर्शन के चलते ऑनलाइन हुई थीं कक्षाएं

छात्रों के आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय परिसर बंद कर कक्षाएं ऑनलाइन कर दी गई थीं। अब छात्रसंघ चुनाव को लेकर प्रशासन की घोषणा के बाद भी विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। छात्रों की मांग है कि चुनाव की प्रक्रिया और अन्य मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि उन्हें अपने आंदोलन को समाप्त करने का भरोसा मिल सके।

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