अयोध्या के लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

  • पिता ने दी मुखाग्नि, सेना ने तिरंगा सौंप कर दी श्रद्धांजलि
  • मां और बहन की भावुक प्रतिक्रिया, पूरे गांव में शोक का माहौल
  • शशांक ने अपने साथी जवान को बचाने के दौरान शहादत पाई

अयोध्या। सिक्किम में शहीद हुए लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी का उनके गृह ग्राम में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पिता जंग बहादुर तिवारी ने मुखाग्नि दी, जबकि सेना के जवानों ने तिरंगा फहराकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। शशांक के अंतिम दर्शन के दौरान पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

शव यात्रा के समय शशांक की मां नीता तिवारी भावुक होकर रोती नजर आईं, जिन्हें आसपास के लोगों ने संभाला। बहन ने तिरंगे में लिपटे भाई को देखकर अपने आंसू नहीं रोक पाईं। हजारों लोगों ने शहीद जवान को श्रद्धांजलि दी, जिसमें मंत्री सूर्य प्रताप शाही भी शामिल रहे।

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लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह अयोध्या मिलिट्री हॉस्पिटल से लाया गया था। उनकी मां की नाजुक स्वास्थ्य स्थिति के कारण उन्हें शहादत की खबर बाद में दी गई। जवानों ने मिलिट्री हॉस्पिटल में भी शशांक को सलामी दी।

सिक्किम में ऑपरेशनल गश्त के दौरान शशांक ने अपने साथी अग्निवीर को नदी में डूबने से बचाने की कोशिश की, लेकिन खुद तेज बहाव में बह गए और शहीद हो गए। 2019 में NDA में चयनित शशांक की पहली पोस्टिंग सिक्किम में हुई थी। वे अपने परिवार के इकलौते बेटे थे, जिनकी अभी शादी नहीं हुई थी।

उनके पिता जंग बहादुर तिवारी मर्चेंट नेवी में सेवारत हैं और वर्तमान में अमेरिका में तैनात हैं। मां नीता तिवारी हृदय रोगी हैं और उनकी तबीयत अक्सर खराब रहती है।

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