हिमाचल प्रदेश में डॉक्टरों की सामूहिक हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप

हिमाचल प्रदेश में डॉक्टरों की सामूहिक हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप

IGMC शिमला समेत राज्य के अस्पतालों में OPD बंद, मरीज बिना इलाज लौट रहे

MRI और अन्य जांच में देरी, मरीज परेशान

नई दिल्ली। ब्रिटेन में कार्यरत भारत के कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि वायु प्रदूषण कोविड-19 महामारी के बाद भारत में सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बन चुका है। डॉक्टरों ने PTI को बताया कि आने वाले वर्षों में प्रदूषण का असर लोगों की सेहत और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर लंबे समय तक दिखाई देगा।

गंभीर बीमारियों का संकेत देने वाले शुरुआती लक्षण

लंदन के सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट राजय नारायण ने कहा कि वायु प्रदूषण से हृदय, फेफड़े, न्यूरोलॉजिकल और अन्य बीमारियों का सीधा संबंध है। उन्होंने चेतावनी दी कि हल्की खांसी, सिरदर्द, थकान, गले में जलन, आंखों में सूखापन और बार-बार संक्रमण जैसे शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज किए जाते हैं, जबकि ये गंभीर बीमारियों के संकेत हैं।

छोटे कणों का बड़ा खतरा

बर्मिंघम के मिडलैंड मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर डेरेक कॉनॉली ने कहा कि पार्टिकुलेट मैटर (PM) या प्रदूषण के छोटे-छोटे कण लोगों में हृदय रोग का खतरा बढ़ाते हैं। ये कण दिखाई नहीं देते और ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल की तरह आसानी से मापा नहीं जा सकता।

डॉक्टरों की चेतावनी: समय पर कार्रवाई जरूरी

लिवरपूल के पल्मोनोलॉजिस्ट मनीष गौतम ने कहा कि वायु प्रदूषण पर सरकार का फोकस जरूरी है, लेकिन इसमें देरी हो चुकी है। दिसंबर में दिल्ली के अस्पतालों में सांस संबंधी मरीजों की संख्या में 20-30% की बढ़ोतरी देखी गई, जिनमें कई युवा और पहली बार इलाज कराने वाले शामिल थे।

डॉक्टरों ने कहा कि अगर तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदूषण हर साल और गंभीर होता जाएगा और स्वास्थ्य व आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

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