- 30 सितंबर को खत्म होगा मेहली मिस्त्री का कार्यकाल
- 15 सितंबर को ईमेल से दी अलग होने की जानकारी
- टाटा मेडिकल सेंटर ट्रस्ट के अन्य ट्रस्टियों को भी भेजा ईमेल
नई दिल्ली। दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के करीबी सहयोगी रहे मेहली मिस्त्री टाटा समूह से जुड़ी अपनी कई जिम्मेदारियों से अलग हो रहे हैं। अब वह कोलकाता स्थित Tata Medical Center Trust में भी अपनी भूमिका जारी नहीं रखेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक उनका मौजूदा कार्यकाल 30 सितंबर को खत्म होगा और उन्होंने आगे इस पद पर बने रहने से इनकार किया है।
मिस्त्री ने 15 सितंबर को ईमेल के जरिए अपने फैसले की जानकारी टाटा मेडिकल सेंटर के CEO को दी। उन्होंने अपने निर्णय को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज करने का अनुरोध किया। यह ईमेल टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा समेत अन्य ट्रस्टियों को भी भेजा गया।
कैंसर मरीजों को किफायती इलाज देता है टाटा मेडिकल सेंटर
कोलकाता का Tata Medical Center एक परोपकारी कैंसर अस्पताल है, जिसका संचालन Tata Medical Center Trust करता है। टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक सेंटर का उद्देश्य पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के मरीजों को सुलभ और किफायती कैंसर देखभाल उपलब्ध कराना है। यहां कैंसर की जांच, उपचार, पुनर्वास और पेलिएटिव केयर जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं।
अस्पताल की क्षमता विस्तार के बाद 431 से 437 बेड के बीच बताई गई है। आधिकारिक टाटा स्रोतों के अनुसार बड़ी संख्या में मरीजों के लिए उपचार सब्सिडी के साथ उपलब्ध कराया जाता है।
RNT Associates भी छोड़ चुके हैं मिस्त्री
मेहली मिस्त्री इससे पहले रतन टाटा की निजी निवेश और सलाहकार कंपनी RNT Associates के बोर्ड से भी अलग हो चुके हैं। उन्होंने 30 जून 2026 को इस्तीफा दिया था, जो 1 जुलाई से प्रभावी हुआ। अपने इस्तीफे में उन्होंने अन्य जिम्मेदारियों में व्यस्तता को वजह बताया था।
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RNT Associates रतन टाटा के व्यक्तिगत निवेशों से जुड़ी कंपनी रही है। रिपोर्टों के अनुसार इसके पोर्टफोलियो में Ola Electric और Urban Company जैसी कंपनियों में निवेश शामिल रहे हैं और इसका पोर्टफोलियो करीब ₹1,000 करोड़ का बताया गया है।
रतन टाटा से जुड़े ट्रस्टों से भी हो चुका है बदलाव
मिस्त्री रतन टाटा से जुड़े कुछ ट्रस्टों की जिम्मेदारियों से भी पहले अलग हो चुके हैं। RNT Associates से उनके इस्तीफे के संबंध में रिपोर्टों में बताया गया कि रतन टाटा की वसीयत के तहत ट्रस्टियों में बदलाव के बाद कंपनी के निदेशक मंडल में भी जिम्मेदारियां नए ट्रस्टियों को हस्तांतरित की गईं।









