रामनगर में कुदरत का कहर-किसानों की फसलें बर्बाद, गांवों में अफरा-तफरी

  • वर्षों बाद इतना भीषण तूफान, गांवों में मचा हड़कंप

  • गेहूं की फसल खेतों में बिखरी, किसानों की मेहनत पर पानी

  • प्रशासन से तत्काल राहत और मुआवज़े की मांग

रामनगर (बाराबंकी), 17 अप्रैल — गुरुवार शाम बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र में अचानक आए तेज आंधी-तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचाई। करीब शाम 4 बजे शुरू हुई तेज़ हवाओं के साथ आई धूलभरी आंधी ने कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। झोपड़ियों और टिन शेडों के उड़ने से कई ग्रामीणों के आशियाने प्रभावित हुए।

ग्राम पंचायतों में तूफान का व्यापक असर देखने को मिला। तेज गरज और हवाओं ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया। खिड़कियों और दरवाजों से धूल घरों में घुस आई, जिससे लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत हुई। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह का तूफान उन्होंने वर्षों बाद देखा है।

किसानों को सबसे बड़ा नुकसान
इस प्राकृतिक आपदा से सबसे अधिक नुकसान किसानों को झेलना पड़ा। खेतों में गेहूं की तैयार सूखी बालियां रखी थीं, जिन्हें तेज़ हवाएं खेतों में बिखेर ले गईं। किसान महेश रावत, आनंद कुमार और आशीष ने बताया कि उन्होंने फसल की कटाई के बाद गेहूं को बांधकर रखा था, लेकिन अब पूरी मेहनत दोबारा करनी पड़ेगी।

मौसम विभाग की जानकारी
मौसम विभाग के अनुसार तूफान की रफ्तार 10 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। हवा में नमी 38% और तापमान 36 डिग्री सेल्सियस रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह असमय मौसम का मिजाज किसानों के लिए चिंता का कारण है।

प्रशासन से मुआवज़े की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक नुकसान की भरपाई नहीं होती, अगली फसल की तैयारी मुश्किल होगी।

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