- राममूर्ति वर्मा के बयान पर ओपी राजभर ने किया पलटवार
- सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट पर चर्चा की चुनौती
- 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के उपवर्गीकरण का मुद्दा उठाया
- रोहिणी आयोग की रिपोर्ट का भी किया उल्लेख
अंबेडकरनगर। टांडा से सपा विधायक राममूर्ति वर्मा के बयान के बाद जिले की सियासत में जुबानी टकराव तेज हो गया है। गुरुवार को अंबेडकरनगर पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने विधायक के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने राममूर्ति वर्मा को सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट पर खुलकर चर्चा करने की चुनौती दी। राजभर ने कहा कि यदि विधायक इस रिपोर्ट पर बोलेंगे तो अखिलेश यादव उन्हें पार्टी से निकाल देंगे।
राजभर ने पिछड़े वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर सपा नेतृत्व पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग के आरक्षण का लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचाने के लिए सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट में उपवर्गीकरण की सिफारिश की गई थी। राजभर ने इसी मुद्दे पर राममूर्ति वर्मा से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने रोहिणी आयोग की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया।
‘अखिलेश से डरते हैं सपा के नेता’
राजभर ने सपा नेताओं पर अखिलेश यादव से दबाव में रहने का आरोप लगाया। उन्होंने राममूर्ति वर्मा पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उन्हें अखिलेश यादव का ‘लोडर’ और ‘गुलाम’ कहा। राजभर के मुताबिक सपा विधायक को सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट पर अपनी बात खुलकर रखनी चाहिए।
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यह बयान राममूर्ति वर्मा के उस पलटवार के बाद आया है, जिसमें उन्होंने राजभर पर सत्ता में रहते हुए अपने समाज के हितों के बजाय निजी और पारिवारिक फायदे के लिए काम करने का आरोप लगाया था। वर्मा ने कहा था कि जनता अब काम का हिसाब मांग रही है।









