गोरखपुर में राप्ती का जलस्तर बढ़ा, बाढ़ का खतरा गहराया

  • मंगलवार शाम से बुधवार सुबह तक 79 सेमी बढ़ा जलस्तर
  • खतरे के निशान 74.98 मीटर से बस करीब 2 मीटर नीचे
  • घाट की सीढ़ियां डूबीं, दाह-संस्कार ऊपर हो रहे

गोरखपुर। राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे गोरखपुर समेत पूर्वांचल के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा गहरा गया है। मंगलवार शाम से बुधवार सुबह तक राप्ती का जलस्तर 79 सेंटीमीटर बढ़ा है। हर घंटे लगभग 5 सेंटीमीटर की रफ्तार से पानी का स्तर बढ़ रहा है।

बुधवार सुबह नदी का जलस्तर 73.02 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जबकि मंगलवार को यह 72.23 मीटर था। हालांकि यह खतरे के निशान 74.98 मीटर से अभी नीचे है, लेकिन अगर यही गति रही तो कुछ ही दिनों में खतरे का निशान पार हो सकता है।

नदी किनारे के इलाकों में मुश्किलें शुरू हो चुकी हैं। सीढ़ियां जलमग्न हो गई हैं और घाटों पर अब दाह-संस्कार ऊपरी स्थानों पर किया जा रहा है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि यह हर साल की स्थिति है — बाढ़ आते ही लोग दुकानें समेटकर सुरक्षित स्थानों पर चले जाते हैं।

नेपाल से छोड़ा गया पानी बना खतरे की वजह

राप्ती नदी नेपाल से निकलती है और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से होकर गुजरती है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता विकास कुमार सिंह ने बताया कि नेपाल में राप्ती को रोकने की कोई व्यवस्था नहीं है। वहां हो रही भारी बारिश और 65 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के चलते जलस्तर में अचानक उछाल आया है।

रोहिन और सरयू भी उफान पर

राप्ती की सहायक नदी रोहिन का जलस्तर भी ढाई मीटर से अधिक बढ़ गया है। यह नदी डोमिनगढ़ के पास राप्ती में मिलती है, जिससे राप्ती का जलस्तर और तेजी से बढ़ रहा है।
उधर, सरयू नदी का जलस्तर अयोध्या में खतरे के निशान को पार कर चुका है। बड़हलगंज के पास जहां राप्ती और सरयू का संगम होता है, वहां भी बाढ़ का असर दिखने लगा है।

प्रशासन ने राप्ती और सरयू से सटे गांवों में अलर्ट जारी कर दिया है। सिंचाई विभाग ने सभी अभियंताओं को बांधों की निगरानी के निर्देश दिए हैं। प्रभावित गांवों में प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।

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