शिकोहपुर जमीन सौदा केस में रॉबर्ट वाड्रा को राहत

राउज एवेन्यू कोर्ट ने बिना अतिरिक्त शर्त दी जमानत, ED ने जांच रिपोर्ट के लिए मांगा समय

  • ED ने जांच के लिए मांगा अतिरिक्त समय
  • DLF जमीन सौदे में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप
  • संजय भंडारी केस में भी आरोपी हैं वाड्रा

रॉबर्ट वाड्रा को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से शिकोहपुर जमीन सौदा मामले में बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने शनिवार को उन्हें प्री-अरेस्ट बेल (नियमित जमानत) दे दी। अदालत ने इस मामले में ED की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए वाड्रा को समन जारी किया था।

कोर्ट ने जमानत देते समय कोई अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई। सुनवाई के दौरान रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) सरकार के इशारे पर काम कर रही है और निष्पक्ष नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

ED ने जांच के लिए मांगा और समय

सुनवाई के दौरान ED के वकील जोहेब हुसैन ने अदालत से विस्तृत जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। उन्होंने कहा कि एजेंसी अभी मामले के कुछ पहलुओं की जांच कर रही है और इसके लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को तय की है।

क्या है शिकोहपुर जमीन सौदा मामला?

ED के अनुसार, वाड्रा की कंपनी ने फरवरी 2008 में गुरुग्राम के शिकोहपुर इलाके में 3.5 एकड़ जमीन ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। बाद में यह जमीन DLF को करीब 58 करोड़ रुपये में बेच दी गई।

एजेंसी का आरोप है कि यह सौदा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ था। इसी आधार पर वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू की गई। जुलाई 2025 में ED ने मामले में FIR दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें रॉबर्ट वाड्रा का नाम भी शामिल किया गया।

संजय भंडारी केस में भी आरोपी

ED ने जुलाई 2025 में ब्रिटेन में रह रहे कथित आर्म्स डीलर संजय भंडारी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।

एजेंसी का दावा है कि वाड्रा और संजय भंडारी के बीच वित्तीय लेनदेन और विदेशी संपत्तियों को लेकर कई संदिग्ध कड़ियां मिली हैं। PMLA के तहत वाड्रा का बयान भी दर्ज किया गया था।

ED ने इस चार्जशीट में वाड्रा को नौवें आरोपी के रूप में शामिल किया है। इस मामले में अदालत 6 दिसंबर को सुनवाई करेगी।

2016 में लंदन भागा था संजय भंडारी

संजय भंडारी पर आयकर विभाग ने काला धन विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की थी। वर्ष 2016 में छापेमारी के बाद वह भारत छोड़कर लंदन चला गया था। बाद में दिल्ली की अदालत ने उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया।

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