
- लिस पर पथराव से कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी
- हाईकोर्ट के आदेश पर हटाया जा रहा था अतिक्रमण
- 90 से ज्यादा वकीलों के चैंबर तोड़े गए
लखनऊ। जिला कोर्ट के बाहर रविवार दोपहर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा हुआ। बुलडोजर से वकीलों के चैंबर तोड़े जाने के विरोध में अधिवक्ता भड़क गए और कई वकील बुलडोजर के सामने खड़े हो गए। पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की तो बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।
पुलिस ने किया लाठीचार्ज
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। पुलिसकर्मियों ने दौड़ा-दौड़ाकर वकीलों और प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाईं। इस दौरान भीड़ की ओर से पुलिस पर पथराव भी किया गया। मौके पर कुछ पुलिसकर्मी भी पत्थर उठाते नजर आए। घटना के बाद कोर्ट परिसर और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
90 से ज्यादा चैंबर तोड़े गए
दरअसल, Allahabad High Court की लखनऊ खंडपीठ ने जिला कोर्ट परिसर के बाहर अवैध अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद नगर निगम ने करीब 240 अवैध निर्माण चिह्नित किए, जिनमें ज्यादातर वकीलों के चैंबर और दुकानें शामिल थीं।
रविवार सुबह करीब 9 बजे नगर निगम की टीम 10 बुलडोजर और करीब 300 पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान करीब 90 चैंबर तोड़ दिए गए। नगर निगम की टीम चैंबरों में रखी कुर्सियां, चटाइयां और अन्य सामान गाड़ियों में भरकर ले गई।
वकील ने फंदे से लटकने की कोशिश की
कार्रवाई के दौरान एक वकील ने अपना चैंबर बंद कर फंदे से लटकने की कोशिश की। पुलिसकर्मियों ने बगल का चैंबर तोड़कर उसे बाहर निकाला। वहीं एक अन्य वकील पुलिस के सामने हाथ जोड़कर अपना चैंबर न तोड़ने की गुहार लगाता रहा। उसने कहा कि वह पिछले 36 वर्षों से उसी चैंबर में बैठ रहा है और अगर चैंबर तोड़ा गया तो वह जीवित नहीं रहेगा।
3 पॉइंट में समझिए पूरा मामला
1. 2020 से चल रहा विवाद
साल 2020 में सदर तहसील क्षेत्र में कुछ वकीलों के चैंबर तोड़े गए थे। इस पर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यूपी सरकार से पूछा था कि वकीलों के पुनर्वास की क्या व्यवस्था की गई है।
2. 2025 में भी हुआ था विरोध
अक्टूबर 2025 में सिविल कोर्ट परिसर में सेंट्रल बार एसोसिएशन से जुड़े कुछ वकीलों के अस्थायी चैंबर प्रशासन ने हटाए थे, जिसका अधिवक्ताओं ने विरोध किया था।
3. 7 मई को आया हाईकोर्ट का आदेश
जनवरी 2026 में कोर्ट परिसर के बाहर अवैध कब्जों की शिकायतें बढ़ीं। इसके बाद वकील सुनीता सिंह समेत अन्य लोगों ने कोर्ट में याचिका दाखिल की। 7 मई को हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। 12 मई को नगर निगम ने अवैध चैंबरों पर लाल निशान लगाकर 16 मई तक जगह खाली करने का नोटिस जारी किया था।









