
- सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मामले की सुनवाई जारी
- धार्मिक आस्था बनाम मौलिक अधिकार पर बहस
- त्रावणकोर बोर्ड ने परंपरा का दिया हवाला
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई जारी है, जहां धार्मिक परंपरा और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर गहन बहस हो रही है।
आस्था बनाम अधिकार पर बहस तेज
मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म की प्रथा सही है या नहीं, इसका निर्णय उस समुदाय की आस्था के आधार पर होना चाहिए, न कि अदालत के व्यक्तिगत विचारों पर।
समुदाय की आस्था को प्राथमिकता
सिंघवी ने दलील दी कि धर्म एक समूह की आस्था से जुड़ा विषय है। ऐसे में कुछ व्यक्तियों के अधिकार पूरे समुदाय की परंपराओं पर हावी नहीं हो सकते।
उन्होंने महिलाओं की एंट्री के मुद्दे को इसी संदर्भ में रखा।
केंद्र सरकार का भी समर्थन
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने भी धार्मिक परंपराओं के सम्मान की बात कही।
सरकार ने तर्क दिया कि देश के कई मंदिरों में पुरुषों के प्रवेश पर भी रोक होती है, इसलिए परंपराओं को एकतरफा भेदभाव नहीं माना जाना चाहिए।
पहले भी हो चुकी है सुनवाई
7 से 9 अप्रैल तक चली पिछली सुनवाई में भी महिलाओं की एंट्री के विरोध में विस्तृत दलीलें दी गई थीं।
यह मामला लंबे समय से कानूनी और सामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है।









