संघ प्रमुख की यूपी यात्रा- संगठन को मजबूती देने की कवायद तेज

  • उत्तर प्रदेश प्रवास में संघ प्रमुख का संगठनात्मक समीक्षा और संत समाज से संवाद पर फोकस्र
  • शताब्दी वर्ष से पहले संघ की रणनीति पर गहन मंथन, पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से जोड़ने की पहल
  • लखनऊ से लखीमपुर तक संघ प्रमुख की यात्रा, सामाजिक और संगठनात्मक समीकरणों पर विशेष ध्यान

    लखनऊ।  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत उत्तर प्रदेश दौरे पर हैं। मिर्जापुर प्रवास के बाद वह सोमवार देर शाम राजधानी लखनऊ पहुंचेंगे, जहां वह भारती भवन में संघ के अवध प्रांत के प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। चर्चा का मुख्य विषय संघ के आगामी शताब्दी समारोह की तैयारियां और संगठन की रणनीतिक दिशा होगी।

लखनऊ के बाद लखीमपुर, संत समाज से मुलाकात

मंगलवार को भागवत लखीमपुर खीरी के लिए रवाना होंगे, जहां वह कबीरपंथी संत असंग देव महाराज से मिलेंगे। असंग देव पूर्वी भारत में सामाजिक प्रभाव रखने वाले संत माने जाते हैं। संघ सूत्रों का कहना है कि यह मुलाकात पूर्वांचल और अवध के संत समाज से संबंध मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

यह भी चर्चा है कि भागवत मार्ग में नेमिषारण्य में भी रुक सकते हैं, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। उनके आगामी प्रवास में कानपुर और ब्रज क्षेत्र भी शामिल हैं।

निष्क्रिय कार्यकर्ताओं से ‘मन-ठीक’ पहल

संघ प्रमुख के लखनऊ प्रवास का एक और अहम उद्देश्य है— पुराने और निष्क्रिय कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करना। संगठन चाहता है कि वर्षों से निष्क्रिय चल रहे अनुभवी स्वयंसेवक फिर से सक्रिय हों, ताकि शताब्दी वर्ष में उनका अनुभव संगठन को मजबूती दे सके। इस पहल को ‘मन-ठीक’ नाम दिया गया है।

समाजिक चिंतन और भविष्य की योजनाएं

अपने दौरे के दौरान भागवत संगठन के पदाधिकारियों के साथ समाज में संघ की भूमिका को लेकर भी चिंतन करेंगे। बताया जा रहा है कि अक्टूबर-नवंबर 2025 से संघ एक विशेष जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रहा है, जिसमें लोगों को संघ के इतिहास और योगदान से अवगत कराया जाएगा। इस यात्रा को संघ के शताब्दी समारोह की तैयारी के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है।

लखनऊ पहले भी रहा है भागवत का फोकस

डॉ. मोहन भागवत इससे पहले भी कई बार लखनऊ का दौरा कर चुके हैं। 2022 में उन्होंने यहाँ एक बौद्धिक सत्र में “समरसता और संगठन” विषय पर विचार रखे थे। हर दौरे में वह संगठन की जमीनी स्थिति को समझते हैं और दिशा निर्देश देते हैं। इस बार की उनकी यात्रा को विश्लेषकों ने विशेष रणनीतिक महत्व वाला बताया है।

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