कन्नौज। गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर यात्रा कर रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बुधवार रात कन्नौज में चौराहे पर रुकने को मजबूर हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें निर्धारित स्थान पर ठहरने की अनुमति नहीं दी, जिसके चलते उन्हें सड़क किनारे रात बितानी पड़ी।
शंकराचार्य बुधवार शाम करीब 7 बजे कन्नौज पहुंचे। इसके बाद वह अपने शिष्यों के साथ पाल चौराहे पर ही बैठ गए। वहां खाली जमीन पर टेंट लगाया गया और करीब दो घंटे तक वे वहीं रहे। बाद में शिष्य उन्हें वैनिटी वैन में लेकर गए। गुरुवार सुबह वह अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हुए फर्रुखाबाद के लिए रवाना हो गए।
शंकराचार्य ने कहा कि प्रशासन उन्हें परेशान कर रहा है। उन्होंने बताया कि जिस स्कूल में उनके रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई थी, वहां प्रशासन ने अनुमति न होने का हवाला देते हुए रुकने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने सरकारी जमीन पर रुकने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा, “हम गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए निकले हैं। अब तक 150 विधानसभाओं से होकर गुजर चुके हैं और अपनी यात्रा हर हाल में पूरी करेंगे।”
हालांकि कन्नौज के जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। डीएम ने कहा कि प्रशासन संतों का सम्मान करता है और शंकराचार्य को कहीं भी रुकने से नहीं रोका गया। उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था।
जानकारी के अनुसार, शंकराचार्य की यात्रा औरैया के बिधूना क्षेत्र से होते हुए शाम साढ़े छह बजे तिर्वा विधानसभा पहुंची थी। वहां समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद यात्रा कन्नौज शहर पहुंची और पाल चौराहे पर ठहरी।









