भारत में सस्ता होगा स्टारलिंक इंटरनेट?

एलन मस्क बोले- प्रतिस्पर्धा से यूजर्स को फायदा

नई दिल्ली। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की लॉन्चिंग को लेकर चल रही बहस के बीच स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने संकेत दिया है कि भारतीय बाजार में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनी को अपनी सेवाओं की कीमत प्रतिस्पर्धी रखनी होगी। उनका कहना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे और इसका फायदा आम लोगों को होगा। हालांकि, मस्क ने भारत में स्टारलिंक की सेवा के लिए किसी निश्चित कीमत की घोषणा नहीं की है। <Cite refs={[“turn140811search0″,”turn140811search3”]}/>

स्टारलिंक की कीमत पर क्या बोले एलन मस्क?

मस्क के मुताबिक, यदि स्टारलिंक की सेवा भारत में बहुत महंगी होगी तो ग्राहक उसे नहीं चुनेंगे। ऐसे में कंपनी को बाजार की जरूरत और ग्राहकों की क्षमता को ध्यान में रखकर कीमत तय करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि स्टारलिंक के आने से मुकेश अंबानी के कारोबार के मुनाफे पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन इससे उनका कारोबार खत्म नहीं हो जाएगा।

भारत में मोबाइल इंटरनेट की कीमतें पहले से काफी कम हैं। ऐसे में स्टारलिंक के सामने चुनौती सिर्फ सैटेलाइट के जरिए कनेक्टिविटी देना नहीं, बल्कि अपनी सेवा को भारतीय ग्राहकों के लिए किफायती बनाना भी होगी। <Cite refs={[“turn140811search0″,”turn140811search2”]}/>

मुकेश अंबानी पर मस्क के तंज से बढ़ा विवाद

स्टारलिंक की भारत में लॉन्चिंग में देरी को लेकर मस्क पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उन्होंने मुकेश अंबानी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘प्राइम मिनिस्टर अंबानी’ कहा और सवाल उठाया कि क्या स्टारलिंक को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति मिलेगी।

मस्क का आरोप है कि प्रभावशाली कारोबारी हित स्टारलिंक की एंट्री में बाधा बन रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने सार्वजनिक रूप से ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं। केंद्र सरकार ने भी इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियों के लिए नियामकीय प्रक्रिया निष्पक्ष है और स्टारलिंक समेत संबंधित कंपनियां जरूरी मंजूरियों की प्रक्रिया से गुजर रही हैं। <Cite refs={[“turn140811search4″,”turn140811search6”]}/>

दूरदराज के इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने का दावा

मस्क का कहना है कि स्टारलिंक उन इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने में मदद कर सकता है, जहां पारंपरिक नेटवर्क की पहुंच सीमित है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों के बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा और छोटे कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, सेवा की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत में इसकी कीमत, उपलब्धता और जरूरी सरकारी मंजूरियां कैसी रहती हैं। फिलहाल स्टारलिंक की व्यावसायिक सेवा शुरू होने और भारतीय ग्राहकों के लिए अंतिम कीमत तय होने का इंतजार है।

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