- चीनी के दाम बढ़ने पर सरकार ने सफाई दी
- एथेनॉल को कीमत बढ़ने की वजह मानने से इनकार
- चीनी से एथेनॉल की हिस्सेदारी घटकर 9% हुई
नई दिल्ली। सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर किए जा रहे उन दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल को कीमत बढ़ने की वजह बताया गया था। खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि बाजार में चीनी के दाम बढ़ने के पीछे मुख्य कारण कम उत्पादन, त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग और जमाखोरी है।
सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए चीनी पर स्टॉक लिमिट लागू करने और ड्यूटी फ्री इंपोर्ट जैसे कदम उठाए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, एथेनॉल उत्पादन में चीनी के इस्तेमाल को बढ़ती कीमतों से जोड़ना सही नहीं है।
एथेनॉल में घटा चीनी का इस्तेमाल
मंत्रालय ने बताया कि पेट्रोल में मिलाने के लिए चीनी से एथेनॉल बनाने की हिस्सेदारी लगातार कम हुई है। 2022-23 सीजन में यह हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत थी, जो 2025-26 सीजन में घटकर लगभग 9 प्रतिशत रह गई है।
वर्तमान में देश में उत्पादित कुल एथेनॉल में करीब 75 प्रतिशत हिस्सा अनाज से आता है। इसमें मक्का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी को एथेनॉल उत्पादन से जोड़ना उचित नहीं है।
अतिरिक्त चीनी बनी चुनौती
भारत में हर साल करीब 32-34 मिलियन टन चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत लगभग 28-29 मिलियन टन रहती है। पहले खपत से अधिक पैदा होने वाली चीनी मिलों के पास स्टॉक के रूप में जमा रहती थी। इससे मिलों की बड़ी रकम फंस जाती थी और किसानों को गन्ने का भुगतान करने में परेशानी होती थी।









