
नई दिल्ली/लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाली यूजीसी नियमावली 2026 पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। फिलहाल 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे। इस मामले में याचिका डालने वाले बीएचयू के शोध छात्र मृत्युंजय तिवारी ने न्यायालय का धन्यवाद कहा और इसे “पहली जीत” बताया।
इस फैसले के विरोध में लगभग 5,000 छात्र कक्षाएं छोड़कर सड़क पर उतर आए। पुलिस के साथ छात्रों की झड़प भी हुई। मौके पर तीन थानों की फोर्स और लगभग 500 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की थी। कोर्ट ने कहा कि नए नियम सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ भेदभाव कर सकते हैं और उन्हें लागू करना उल्टी दिशा में जाने जैसा है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए और सुरक्षा की आवश्यकता वाले लोगों के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
मृत्युंजय तिवारी का बयान
मृत्युंजय ने बताया कि उन्होंने 15 फरवरी को याचिका दायर की थी, और आज सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए रोक लगाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कई पोस्ट चलाए गए, लेकिन अब आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।
उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय में शांति मार्च निकाला जाएगा, जिसमें सरकार से मांग की जाएगी कि नए नियम को पूरी तरह समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि कई छात्र इस नियम के आने के बाद भयभीत थे, क्योंकि नियम के अनुसार वे पहले ही दोषी माने जाते।








