
- मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तीन स्तरीय व्यवस्था लागू
- सुरक्षा में रिंग राउंड, स्पेशल ब्रांच और जिला पुलिस की भूमिका
- सीएम की मूवमेंट पर सुरक्षा एजेंसियां हमेशा अलर्ट रहती हैं
नालंदा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुक्रवार को राजगीर स्पोर्ट्स एकेडमी के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे, लेकिन उनकी हेलिकॉप्टर लैंडिंग के दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। हेलिपैड के पास लगे दो टीन शेड तेज हवा के चलते उखड़कर उड़ने लगे। हालांकि, गनीमत रही कि ये हेलिकॉप्टर से टकराए नहीं और सीएम की लैंडिंग सुरक्षित रही।
राजगीर स्पोर्ट्स एकेडमी में हुआ भव्य उद्घाटन
मुख्यमंत्री ने अपने गृह जिले नालंदा के राजगीर में इंडोर हॉल, बास्केटबॉल कोर्ट, हैंडबॉल कोर्ट, वॉलीबॉल कोर्ट और हॉकी प्रैक्टिस टर्फ का उद्घाटन किया। साथ ही, उन्होंने राजगीर स्थित पुलिस अकादमी में नवीन FSL लैब का भी उद्घाटन किया।
पहले भी हेलिकॉप्टर से जुड़ी रही है तकनीकी दिक्कत
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार के हेलिकॉप्टर को लेकर कोई असहज स्थिति बनी हो। 26 मई 2024 को मसौढ़ी के गांधी मैदान में चुनावी सभा के बाद हेलिकॉप्टर में फ्यूल खत्म हो गया था। इसके चलते मुख्यमंत्री को सड़क मार्ग से संपतचक और फिर पटना लौटना पड़ा था। उस वक्त उन्होंने इस चूक पर नाराजगी भी जाहिर की थी।
ऐसे होती है मुख्यमंत्री की सुरक्षा, जानिए तीन लेयर सिस्टम
राज्य के पूर्व DGP अभयानंद के मुताबिक, मुख्यमंत्री की सुरक्षा तीन स्तरों में होती है:
रिंग राउंड सिक्योरिटी: इसमें सीएम को चारों तरफ से सादे कपड़ों में सशस्त्र अधिकारी घेरते हैं। DSP से लेकर कॉन्स्टेबल तक इसमें शामिल रहते हैं।
स्पेशल ब्रांच: इसमें बिहार आर्म्ड फोर्स और जिला पुलिस के सशस्त्र जवान शामिल होते हैं, जिनकी संख्या हालात के अनुसार तय होती है।
जिला पुलिस: सुरक्षा के तीसरे स्तर पर स्थानीय जिला पुलिस होती है जो रिंग राउंड के बाहर तैनात रहती है।
DGP से लेकर कॉन्स्टेबल तक की जिम्मेदारी
सीएम की सुरक्षा में DGP, DG स्पेशल ब्रांच, ADG सिक्योरिटी, DIG और SP सिक्योरिटी तक की निगरानी रहती है। ASP, DSP, इंस्पेक्टर और अन्य सुरक्षा बलों की सतर्क तैनाती होती है। मुख्यमंत्री की हर मूवमेंट पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर रहती है।








