
लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन’ यानी ODOC योजना में बड़ा बदलाव किया है। ‘एक जिला-एक उत्पाद’ मॉडल पर आधारित इस योजना की नई सूची में अब सभी मांसाहारी व्यंजनों को बाहर कर दिया गया है।
नई सूची के अनुसार राज्य के 75 जिलों में केवल शाकाहारी व्यंजन और कृषि आधारित उत्पादों को ही शामिल किया गया है। इससे लखनऊ के मशहूर गलावटी कबाब, अवधी बिरयानी और मुर्ग मुसल्लम जैसे प्रसिद्ध व्यंजन सूची से बाहर हो गए हैं।
लखनऊ की नई पहचान
लखनऊ को नई सूची में मलाई मक्खन, चाट, रेवड़ी और दशहरी आम से जुड़े उत्पादों के लिए चिन्हित किया गया है। जबकि शहर की अंतरराष्ट्रीय पहचान माने जाने वाले टुंडे कबाब और अवधी बिरयानी को योजना में जगह नहीं मिली।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य स्थानीय कृषि उत्पादों, मिठाइयों और पारंपरिक शाकाहारी व्यंजनों को बढ़ावा देना है। प्रशासन के मुताबिक इससे छोटे उद्यमियों और स्थानीय खाद्य उद्योग को फायदा होगा।
75 जिलों की नई सूची जारी
नई संशोधित सूची में प्रदेश के सभी जिलों के लिए अलग-अलग शाकाहारी व्यंजन तय किए गए हैं। Agra को पेठा, Mathura को पेड़ा और छप्पन भोग, जबकि Varanasi को कचौरी, लस्सी और बनारसी पान के लिए चुना गया है। योजना के तहत इन व्यंजनों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार पहले ही इस योजना के लिए बड़ा बजट आवंटित कर चुकी है।
विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
हालांकि इस फैसले के बाद खाद्य विशेषज्ञों और कई लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश की पाक विरासत में कबाब और बिरयानी जैसे व्यंजनों की ऐतिहासिक पहचान रही है,









