लखनऊ नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक में हंगामा

  • मेयर सुषमा खर्कवाल बोलीं– ढाई साल में किसी संकल्प पर काम नहीं हुआ
  • पार्षदों ने लगाया निष्क्रियता का आरोप, कहा— जनता को क्या जवाब दें
  • गड्ढा भरने की मशीन को मेयर ने बताया ‘सफेद हाथी’, अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप

लखनऊ। लालबाग स्थित नगर निगम मुख्यालय में गुरुवार को हुई कार्यकारिणी बैठक में जमकर हंगामा हुआ। काम न होने से नाराज पार्षद अरुण राय और पार्षद पृथ्वी गुप्ता जमीन पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। करीब सवा घंटे तक चली बैठक हंगामे के बीच स्थगित कर दी गई।

मेयर सुषमा खर्कवाल ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “ढाई साल में किसी भी संकल्प पर काम नहीं हुआ है। नगर निगम प्रशासन ने जनता और जनप्रतिनिधियों का अपमान किया है। जब तक निर्णयों पर अमल नहीं होगा, अगली बैठक नहीं बुलाई जाएगी।”

संकल्पों पर नहीं हुआ कोई अमल

पार्षद पृथ्वी गुप्ता ने कहा कि पिछले ढाई साल में सदन और कार्यकारिणी में लिए गए किसी भी निर्णय को लागू नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया, “हम जनता को आखिर क्या जवाब दें?”
बैठक में मेयर, 12 कार्यकारिणी सदस्य और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, लेकिन मेयर और नगर आयुक्त के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से नजर आए।

“गड्ढा भरने की मशीन बनी सफेद हाथी”

मेयर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि “शहर की सड़कों का हाल बदतर है। 10 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद 90% काम अधूरा है।”
उन्होंने कहा कि जिस मशीन को गड्ढे भरने के लिए खरीदा गया था, वह “सफेद हाथी साबित हुई है”— उससे कोई काम नहीं हो रहा।

सफाई, सड़क और बजट पर उठे सवाल

मेयर ने बताया कि शहर की साफ-सफाई में लखनऊ की रैंकिंग गिर रही है। मृतक आश्रितों को नौकरी देने के मामले में भी लापरवाही है— “46 में से 31 को अभी तक नौकरी नहीं दी गई।”
उन्होंने बजट प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया, कहा— “अब अधिकारी नहीं, बल्कि चपरासी बजट भेज रहे हैं, जबकि पहले अधिकारी चर्चा कर भेजते थे।”

झूलेलाल वाटिका बुकिंग पर भी विवाद

मेयर ने झूलेलाल वाटिका की बुकिंग में लापरवाही का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि अपर नगर आयुक्त की गलती से नगर निगम को साढ़े तीन लाख रुपये का नुकसान हुआ। साथ ही नियम विरुद्ध तरीके से अधिवक्ता को अतिरिक्त फीस देने पर भी सवाल उठाया।

पार्षदों ने कहा– “अंधा बांटे रेवड़ी”

कार्यकारिणी सदस्य अनुराग मिश्रा ‘अन्नू’ ने कहा कि अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया—

“दीपावली पर लाइटिंग में गड़बड़ी रही, सड़कें टूटी हैं, टॉयलेट बंद पड़े हैं। अधिकारी जवाबदेही से भाग रहे हैं।”

पार्षदों ने कहा कि “संविदा कर्मियों की कमी, मृतक आश्रितों की अनदेखी और पैनल अधिवक्ताओं को फीस में भेदभाव” जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
उन्होंने तंज कसा— “अंधा बांटे रेवड़ी, घर-घराना खाय वाली स्थिति हो गई है।”

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