देशभर में बिगड़ा मौसम- 26 राज्यों में अलर्ट जारी

  • बिहार में बिजली गिरने से 5 लोगों की जान गई
  • राजस्थान के 22 जिलों में बारिश और तेज हवा का ऑरेंज अलर्ट
  • वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण मौसम का पैटर्न बदल रहा

नई दिल्ली। देशभर में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बुधवार को चेतावनी जारी करते हुए बताया कि देश के 26 राज्यों में तेज आंधी, बारिश और कहीं-कहीं तूफान की स्थिति बन सकती है। गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में ओलावृष्टि की भी आशंका है।

गुजरात से सबसे चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं, जहां आंधी-बारिश से संबंधित घटनाओं में अब तक 14 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य के कई जिलों में बुधवार को भी तेज बारिश और तूफान की संभावना है।

मध्य प्रदेश में 40 जिलों में बिगड़ा मौसम

मौसम विभाग के अनुसार मध्यप्रदेश में 10 मई तक आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर बना रहेगा। भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन में तेज आंधी और इंदौर में बारिश का पूर्वानुमान है। अलीराजपुर, धार और झाबुआ में ओले गिरने की भी चेतावनी दी गई है।

राजस्थान में 22 जिलों में अलर्ट, तापमान में गिरावट

राजस्थान में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिल रहा है। बाड़मेर, उदयपुर, जोधपुर, टोंक सहित 22 जिलों में बारिश और आंधी की चेतावनी दी गई है। कई जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है।

बिहार में बिजली गिरने से 5 मौतें, 110 km/h तक चली आंधी

बिहार में पिछले कुछ दिनों में बिजली गिरने से 5 लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को कई इलाकों में 70-110 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चली।

हरियाणा में पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर में गरज-चमक के साथ बारिश

हरियाणा के कई जिलों में भी बुधवार से मौसम में बदलाव आने के आसार हैं। खासतौर पर पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान है।

8 से 10 मई तक इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

8 मई: महाराष्ट्र, गुजरात, नॉर्थ-ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और दक्षिण भारत में भारी बारिश की चेतावनी।
9 मई: उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में तेज बारिश और तूफान का अलर्ट।
10 मई: लगभग पूरे उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में तेज हवाओं और बारिश की संभावना है।

क्लाइमेट ट्रेंड रिपोर्ट: वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का पैटर्न बदल रहा

जलवायु परिवर्तन पर अध्ययन करने वाली संस्था ‘क्लाइमेट ट्रेंड’ की रिपोर्ट में बताया गया है कि हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी अब पारंपरिक जनवरी-फरवरी की जगह मार्च-अप्रैल में हो रही है। इसका सीधा असर देशभर के मौसम और हीटवेव के ट्रेंड पर पड़ रहा है।

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