वंदे मातरम पर शाह का कांग्रेस पर हमला, बोले- पूरा गीत न गाना तुष्टीकरण

  • 1937 के फैसले को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना
  • भाजपा ने विधानसभा और जनता के बीच विरोध की बात कही
  • कांग्रेस ने कहा- 1937 में शीर्ष नेताओं के फैसले का पालन करेंगे

नई दिल्ली। गृहमंत्री अमित शाह ने वंदे मातरम के पूरे गीत का गायन नहीं करने के कांग्रेस के फैसले पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का केवल शुरुआती दो पैरा गाने का निर्णय तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति है।

शाह ने दावा किया कि कांग्रेस ने 1937 में वंदे मातरम को दो हिस्सों में बांटने का फैसला किया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस ऐतिहासिक फैसले को सुधारने का प्रयास किया है।

1937 के फैसले का किया जिक्र

अमित शाह ने कहा कि 1937 में कांग्रेस के फैसले से राष्ट्रगीत के साथ अन्याय हुआ और इससे दो-राष्ट्र सिद्धांत को मजबूती मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि आगे चलकर इसी तरह की राजनीति ने देश के विभाजन की परिस्थितियों को बढ़ावा दिया।

शाह ने कहा कि वंदे मातरम की रचना के 150वें वर्ष में मोदी सरकार ने पूरे गीत के गायन को बढ़ावा देने का प्रयास किया है।

कांग्रेस के फैसले पर विवाद

दरअसल, कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने बुधवार को फैसला किया था कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के छह पैरा में से केवल शुरुआती दो पैरा गाए जाएंगे।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस संसद के कानून का पालन नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में अब तुष्टीकरण की राजनीति नहीं चलेगी।

भाजपा ने विरोध की बात कही

अमित शाह ने कहा कि भाजपा कांग्रेस के इस फैसले का जनता के बीच और विधानसभा में विरोध करेगी। उन्होंने लोगों से भी इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।

कांग्रेस ने दी सफाई

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रगीत का अपमान करने का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल समेत शीर्ष नेताओं की ओर से लिए गए फैसले का ही पालन कर रही है।

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