नई दिल्ली/नबरंगपुर। सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के आरोप में 22 साल जेल में रहे ओडिशा के अर्जुन जानी को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला न्याय व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
हाईकोर्ट का फैसला रद्द
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने ओडिशा हाईकोर्ट के फैसले और अर्जुन जानी की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया।
देरी से दायर अपील पर नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने जेल से दायर अपील में 3157 दिन (करीब 8 साल 8 महीने) की देरी माफ नहीं करने पर हाईकोर्ट की आलोचना की। उस समय अर्जुन 12 साल से जेल में थे।
न्याय तक पहुंच आसान बनाने पर जोर
कोर्ट ने कहा कि जेल में बंद और हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए न्याय तक पहुंच अब भी कठिन है। ऐसे मामलों में अदालतों को देरी को लेकर उदार और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, क्योंकि यह किसी व्यक्ति की आजादी से जुड़ा मौलिक अधिकार है।









