अंबेडकरनगर। महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े का शुभारंभ हुआ। इस दौरान नेत्रदान को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए यात्रा निकाली गई। अभियान में नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियां दूर करने और लोगों को वैज्ञानिक जानकारी देने पर जोर दिया गया।
नेत्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार पटेल के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने प्रशासनिक भवन से जागरूकता यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यात्रा अकादमिक भवन तक गई। इसमें मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
संकल्प पोस्टर से शुरू हुआ अभियान
कार्यक्रम की शुरुआत प्रशासनिक भवन परिसर में लगाए गए नेत्रदान संकल्प पोस्टर से हुई। चिकित्सकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने पोस्टर पर नेत्रदान को लेकर अपना संकल्प दर्ज किया। इसके बाद जागरूकता यात्रा के माध्यम से नेत्रदान का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया।
12 से 13 लाख लोग कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से प्रभावित
कार्यक्रम में बताया गया कि देश में करीब 12 से 13 लाख लोग कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से प्रभावित हैं। हर साल लगभग 70 हजार नेत्रदान प्राप्त होते हैं। इसके मुकाबले देश में कम से कम एक लाख कॉर्निया डोनेशन तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
प्राप्त होने वाले सभी कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त नहीं होते। विभिन्न कारणों से करीब आधे कॉर्निया ही प्रत्यारोपण के लिए स्वीकार्य हो पाते हैं। इसलिए अभियान के दौरान अधिक से अधिक लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।
कौन कर सकता है नेत्रदान, कब होता है दान
पखवाड़े के दौरान नेत्रदान से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए जाएंगे। इसमें कौन नेत्रदान कर सकता है, नेत्रदान कब किया जाता है, इससे शरीर पर कोई असर पड़ता है या नहीं और क्या हर उम्र का व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है, जैसे विषय शामिल हैं।









