नई दिल्ली। अगर 45 साल की उम्र तक ₹1 करोड़ का फंड तैयार करने का लक्ष्य है, तो निवेश शुरू करने की उम्र बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। म्यूचुअल फंड SIP में जितनी कम उम्र में निवेश शुरू किया जाए, उतनी ही कम रकम हर महीने लगानी पड़ सकती है।
उदाहरण के तौर पर, 25 साल की उम्र से निवेश शुरू करने पर करीब ₹10,200 की मासिक SIP से 45 साल की उम्र तक ₹1 करोड़ का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। वहीं, अगर निवेश 35 साल की उम्र में शुरू किया जाए तो इसी लक्ष्य के लिए करीब ₹44,000 हर महीने निवेश करने की जरूरत पड़ सकती है।
कंपाउंडिंग से बढ़ता है निवेश का फायदा
लंबी अवधि के निवेश में कंपाउंडिंग अहम भूमिका निभाती है। इसका मतलब है कि निवेश पर मिलने वाला रिटर्न आगे चलकर खुद रिटर्न कमाने लगता है। यही वजह है कि लंबे समय तक निवेश करने पर छोटी रकम भी बड़ा फंड बनाने में मदद कर सकती है।
अगर औसतन 12% सालाना रिटर्न मानकर गणना की जाए, तो शुरुआती उम्र में SIP शुरू करने से निवेश को बढ़ने के लिए ज्यादा समय मिलता है। इसके विपरीत, देर से शुरुआत करने पर कंपाउंडिंग के लिए कम समय बचता है और लक्ष्य पूरा करने के लिए हर महीने ज्यादा रकम निवेश करनी पड़ती है।
25 और 35 की उम्र में निवेश का अंतर
25 साल की उम्र में SIP शुरू करने वाले निवेशक के पास ₹1 करोड़ का लक्ष्य हासिल करने के लिए करीब 20 साल का समय होगा। इस दौरान निवेश और उस पर मिलने वाले रिटर्न को बढ़ने के लिए पर्याप्त समय मिलता है।
वहीं 35 साल की उम्र में शुरुआत करने पर यही लक्ष्य हासिल करने के लिए सिर्फ 10 साल का समय मिलेगा। इसलिए मंथली निवेश की रकम कई गुना बढ़ जाती है।
रिटर्न की गारंटी नहीं होती
यह गणना 12% सालाना औसत रिटर्न की धारणा पर आधारित है। म्यूचुअल फंड और इक्विटी SIP में रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है और इसकी कोई गारंटी नहीं होती। वास्तविक रिटर्न अलग होने पर ₹1 करोड़ का लक्ष्य हासिल करने के लिए जरूरी SIP भी बदल सकती है।









