संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को दुनिया के नक्शे को दिखाने के तरीके में बदलाव से जुड़ा एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया। भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। नए तरीके से नक्शे पर देशों और महाद्वीपों का आकार उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात में ज्यादा सटीक नजर आएगा।
मर्केटर मैप में दिखता है आकार का अंतर
अब तक दुनिया के नक्शे में मर्केटर प्रोजेक्शन का व्यापक इस्तेमाल होता रहा है। इस प्रोजेक्शन में भूमध्य रेखा से दूर स्थित क्षेत्र अपने वास्तविक आकार की तुलना में बड़े दिखाई देते हैं, जबकि भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके अपेक्षाकृत छोटे नजर आते हैं।
नए प्रस्ताव में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन को अपनाने की बात कही गई है। इसमें पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों के क्षेत्रफल को अधिक सही अनुपात में दिखाने पर जोर दिया गया है।
अफ्रीका बड़ा, यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे दिखेंगे
नए नक्शे में अफ्रीका का आकार मौजूदा मर्केटर नक्शे की तुलना में काफी बड़ा नजर आएगा। इसके उलट यूरोप और उत्तरी अमेरिका पहले की तुलना में छोटे दिखाई देंगे। एशिया के कुछ हिस्सों के आकार में भी बदलाव नजर आ सकता है।
हालांकि, यह बदलाव केवल नक्शे पर दिखाई देने वाले आकार से जुड़ा है। किसी देश की वास्तविक जमीन, सीमाओं या क्षेत्रफल पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।









