- बच्चों के यौन शोषण और हानिकारक कंटेंट की जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने की सहमति
- सरकार ने कहा- बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
- दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से भी सरकार की बातचीत जारी
नई दिल्ली। टेक कंपनी Meta ने बच्चों के यौन शोषण और उनकी ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े अन्य मामलों की जानकारी संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमति जताई है। सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
यह सहमति केंद्र सरकार और Meta के बीच ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर हानिकारक कंटेंट को रोकने को लेकर चल रही बातचीत के दौरान बनी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में काम करने वाले किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं
सरकारी सूत्रों के मुताबिक बच्चों की सुरक्षा के मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी तय की जा रही है। सरकार ने कहा है कि बच्चों को ऑनलाइन नुकसान से बचाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों ने Meta की सहमति को बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने की दिशा में शुरुआती कदम बताया है। साथ ही कहा कि इस दिशा में अभी और काम किए जाने की जरूरत है।
दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से भी बातचीत
बच्चों से जुड़े हानिकारक कंटेंट को लेकर सरकार अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन इंटरमीडियरीज के साथ भी बातचीत कर रही है।
प्लेटफॉर्म्स से ऐसे कंटेंट की पहचान करने, उसे हटाने और बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी व्यवस्था मजबूत करने को कहा जा रहा है। सरकार का जोर ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने पर है।
NCPCR ने Meta अधिकारियों को किया था तलब
9 सितंबर को Meta India के प्रतिनिधि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी NCPCR के कार्यालय पहुंचे थे। आयोग ने Meta के मैनेजिंग डायरेक्टर और Meta India के प्रमुख को चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन एंड एब्यूज मटेरियल (CSEAM) से जुड़े कथित विज्ञापनों की जांच के सिलसिले में तलब किया था।
NCPCR ने 3 जुलाई 2026 को BBC की एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया था। रिपोर्ट में Meta के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म्स पर CSEAM से जुड़े कथित विज्ञापनों का जिक्र किया गया था।









