नई दिल्ली। अगर आप रोजमर्रा की खरीदारी के लिए UPI पर निर्भर रहते हैं, तो 2 अक्टूबर को कुछ दुकानों और बाजारों में कैश की जरूरत पड़ सकती है। देशभर के कई व्यापारिक संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान किया है। यह विरोध 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के खिलाफ किया जा रहा है।
₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% MDR
नए नियम के तहत 15 अक्टूबर से पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4% MDR लगाया जाना है। यह शुल्क व्यापारी से लिया जाएगा, ग्राहक से नहीं। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा।
QR कोड और साउंड बॉक्स ढकेंगे व्यापारी
विरोध के दौरान व्यापारी अपने दुकानों पर लगे QR कोड, UPI स्कैनर, साउंड बॉक्स और दूसरे डिजिटल पेमेंट डिवाइस काले कपड़े से ढकेंगे। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अतिरिक्त MDR से पहले से कम मार्जिन पर काम कर रहे कारोबारियों की लागत बढ़ेगी।
500 से ज्यादा संगठन साथ आने का दावा
महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे के मुताबिक, कई व्यापारिक संगठनों से इस मुद्दे पर बातचीत की गई है। MACCIA और उसके 500 से ज्यादा संबद्ध संगठन मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांग रखने की तैयारी में हैं।
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UPI पूरी तरह बंद नहीं होगा
‘नो UPI डे’ व्यापारिक संगठनों की ओर से प्रस्तावित विरोध है। इसका मतलब यह नहीं है कि 2 अक्टूबर को देशभर में UPI सिस्टम आधिकारिक रूप से बंद रहेगा। किन दुकानों पर व्यापारी UPI स्वीकार नहीं करेंगे, यह संबंधित व्यापारिक संगठनों और दुकानदारों के फैसले पर निर्भर करेगा।









