अंबेडकरनगर। नवरात्र के दूसरे दिन जलालपुर के रामलीला मैदान में रामलीला का शुभारंभ पारंपरिक पूजन-अर्चन और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। श्री रामलीला सेवा समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में रावण, कुंभकरण और विभीषण की तपस्या, ब्रह्मा से वरदान मिलने, रावण के अत्याचारों और राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ के प्रसंगों का मंचन किया गया। दृश्यों के दौरान मैदान में मौजूद दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।
तीनों भाइयों की तपस्या और ब्रह्मा से वरदान का मंचन
रामलीला के पहले दृश्य में रावण, कुंभकरण और विभीषण की घोर तपस्या दिखाई गई। प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने तीनों को वरदान दिया। रावण को शक्ति, कुंभकरण को निद्रा और विभीषण को भक्ति व धर्म के मार्ग से जुड़ा वरदान मिलने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
इसके बाद रावण के अहंकार और अत्याचारों का मंचन हुआ। रावण द्वारा ऋषि-मुनियों को प्रताड़ित करने और तीनों लोकों में आतंक फैलाने के दृश्य दिखाए गए।
दशरथ के यज्ञ का प्रसंग भी दिखाया
रामलीला के अगले दृश्य में पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दशरथ द्वारा यज्ञ कराने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। यज्ञ से प्रकट दिव्य पुरुष ने दशरथ को खीर का पात्र दिया। दशरथ ने उसे अपनी तीनों रानियों में बांट दिया। कलाकारों ने इन प्रसंगों का मंचन किया, जिसकी दर्शकों ने सराहना की।
पूजन में समिति के पदाधिकारी रहे शामिल
शुभारंभ के दौरान क्षेत्रीय सदस्य राम किशोर राजभर, समिति अध्यक्ष संजीव मिश्र, आलोक बाजोरिया, महामंत्री कृष्ण गोपाल गुप्ता, उपाध्यक्ष अरुण मिश्र और राधेश्याम शुक्ल, आशाराम मौर्य, मीडिया प्रभारी विकास निषाद व दिलीप यादव सहित अन्य पदाधिकारियों ने पूजन किया।









