आलापुर (अंबेडकरनगर)। आलापुर सर्किल में एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि भूमि, रास्ते, आपसी रंजिश और गांव की राजनीति से जुड़े विवादों में भी इस कानून का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुकदमे में कई लोगों के नाम शामिल होने पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ मामलों में एक-दो लोगों के बजाय बड़ी संख्या में लोगों को आरोपी बनाया जाता है। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपित पक्ष को पुलिस और न्यायालय की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
वहीं, विवेचना के दौरान कुछ नाम हटाए जाने और कुछ मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगाए जाने का भी दावा किया जा रहा है। इसी आधार पर सवाल उठाया जा रहा है कि मुकदमा दर्ज करने से पहले उपलब्ध तथ्यों की जांच किस स्तर तक की जाती है।
थानावार रिकॉर्ड तैयार कराने की मांग
स्थानीय लोगों ने आलापुर सर्किल के सभी थानों में पिछले कुछ वर्षों में एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों का थानावार रिकॉर्ड तैयार कर निष्पक्ष समीक्षा कराने की मांग की है।
समीक्षा में यह देखा जाने की मांग है कि कितने मामलों में आरोपपत्र दाखिल हुआ, कितने में विवेचना के दौरान आरोपितों के नाम हटाए गए और कितने मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगी। न्यायालय में मामलों की स्थिति का भी रिकॉर्ड के आधार पर विश्लेषण करने की मांग की गई है।
पूर्व वर्षों की कार्रवाई की भी हो समीक्षा
मांग उठाई गई है कि पूर्व वर्षों में एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने और कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जाए। इसमें पूर्व क्षेत्राधिकारी राम बहादुर सिंह के कार्यकाल के दौरान हुई कार्रवाई के रिकॉर्ड को भी शामिल करने की मांग की गई है।









