
नई दिल्ली। दिल्ली के विजय चौक पर गुरुवार शाम को भव्य बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी का आयोजन किया गया, जिसके साथ ही गणतंत्र दिवस के चार दिन तक चले कार्यक्रमों का समापन हुआ। इस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समेत उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेनाओं के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री उपस्थित रहे।
समारोह की शुरूआत
समारोह की शुरुआत में सेना ने राष्ट्रपति को नेशनल सैल्यूट दिया और इसके बाद तिरंगा फहराया गया, साथ ही राष्ट्रगान की धुन बजाई गई। तीनों सेनाओं के बैंड ने कार्यक्रम की शुरुआत “कदम-कदम बढ़ाए जा” की धुन से की।
बैंड प्रस्तुति और धुनें
- संयुक्त सेना के पाइप्स एंड ड्रम्स बैंड ने ‘अतुल्य भारत’, ‘वीर सैनिक’, ‘मिली झुली’, ‘नृत्य सरिता’, ‘मरूनी’ और ‘झेलम’ जैसी मधुर धुनें पेश की।
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) का बैंड ने ‘विजय भारत’, ‘हथरोही’, ‘जय हो’ और ‘वीर सिपाही’ की धुनें प्रस्तुत कीं।
- भारतीय वायुसेना का बैंड ‘ब्रेव वॉरियर’, ‘ट्वाइलाइट’, ‘अलर्ट’ और ‘फ्लाइंग स्टार’ की प्रस्तुतियां दी।
- नौसेना बैंड ने ‘हम तैयार हैं’, ‘सागर पवन’, ‘मां तुझे सलाम’, ‘जोशीला देश’ और ‘जय भारती’ की धुनें प्रस्तुत कीं।
- भारतीय सेना बैंड ने ‘विजयी भारत’, ‘आरंभ है प्रचंड है’, ‘ऐ वतन, ऐ वतन’, ‘आनंद मठ’, ‘सुगम्य भारत’ और ‘सितारे हिंद’ की मनोहारी धुनें पेश की।
समारोह के अंतिम हिस्से में मास बैंड ने ‘भारत की शान’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘ड्रमर्स कॉल’ बजाई, जबकि समापन अमर धुन “सारे जहां से अच्छा” पर हुआ।
सीटिंग एनक्लोजर में भारतीय वाद्ययंत्रों का सम्मान
इस साल की एक विशेषता यह रही कि विजय चौक के सीटिंग एनक्लोजर को भारतीय वाद्य यंत्रों के नाम दिए गए। इनमें बांसुरी, डमरू, एकतारा, तबला, वीणा, सितार, शहनाई, संतूर, सरोद, पखावज, नगाड़ा और मृदंगम शामिल हैं। यह पहल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का प्रतीक मानी जा रही है।









