फर्नीचर कारोबारियों ने जीएसटी में राहत की मांग उठाई

यूपी फर्नीचर ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने वित्त मंत्री को भेजा ज्ञापन, छोटे कारोबारियों के लिए टैक्स और जीएसटी अनुपालन आसान करने की मांग

लखनऊ। यूपी फर्नीचर ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक में फर्नीचर उद्योग को राहत देने की मांग उठाई है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष इकबाल हसन सिद्दीकी ने केंद्रीय वित्त मंत्री और जीएसटी काउंसिल की अध्यक्ष निर्मला सीतारमण को ई-मेल और ज्ञापन भेजकर एमएसएमई कारोबारियों की समस्याओं से अवगत कराया है।

हस्तनिर्मित फर्नीचर पर जीएसटी घटाने की मांग

एसोसिएशन ने सहारनपुर, लखनऊ, बरेली और कानपुर क्लस्टर में तैयार होने वाले हस्तनिर्मित और पारंपरिक लकड़ी के फर्नीचर पर जीएसटी दर घटाकर 5 या 12 प्रतिशत करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि बांस और बेंत से बने उत्पादों को जिस तरह कर राहत दी गई है, उसी तर्ज पर पारंपरिक फर्नीचर को भी राहत मिलनी चाहिए।

छोटे कारोबारियों पर बढ़ा प्रतिस्पर्धा का दबाव

इकबाल हसन सिद्दीकी के मुताबिक, बड़े कॉरपोरेट्स के फर्नीचर उत्पादों पर जीएसटी दर 28 से घटकर 18 प्रतिशत होने के बाद छोटे और असंगठित फर्नीचर कारोबारियों के सामने प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ा है। उनका कहना है कि मौजूदा जीएसटी दरों की विसंगतियां छोटे निर्माताओं और विक्रेताओं के लिए कारोबार को मुश्किल बना रही हैं।

इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में सुधार की मांग

एसोसिएशन ने प्लाईवुड, लैमिनेट, फेविकोल और हार्डवेयर फिटिंग्स पर 18 प्रतिशत जीएसटी के कारण पैदा हो रहे इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में सुधार की मांग की है। इसके साथ ही आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) रिफंड को समयबद्ध करने का अनुरोध किया गया है, ताकि कारोबारियों की पूंजी अनावश्यक रूप से अटकी न रहे।

सप्लायर की गलती का खामियाजा खरीदार को न भुगतना पड़े

ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि यदि किसी सप्लायर की ओर से गलती होती है तो उसका खामियाजा निर्दोष खरीदार को न भुगतना पड़े। ऐसे मामलों में खरीदार का आईटीसी रद्द नहीं किया जाना चाहिए। एसोसिएशन ने जीएसटी व्यवस्था में इस संबंध में स्पष्ट और कारोबारियों के हित में प्रावधान किए जाने की मांग की है।

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ई-इनवॉइस और रिटर्न प्रक्रिया आसान करने की मांग

एसोसिएशन ने छोटे कारोबारियों के लिए ई-इनवॉइसिंग, जीएसटी रिटर्न और कंपोजिशन स्कीम की प्रक्रिया को और सरल बनाने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि अनुपालन की जटिल प्रक्रिया से छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त प्रशासनिक और आर्थिक दबाव पड़ता है। प्रक्रिया आसान होने से कारोबारी बिना अतिरिक्त दबाव के अपने व्यवसाय पर ध्यान दे सकेंगे।

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