
- सरकारी अस्पतालों के भीतर पनपता निजी गठजोड़
- मरीजों को बहलाकर निजी संस्थानों तक पहुंचाने का खेल
- ओपीडी से वार्ड तक दलालों की मजबूत पकड़
अम्बेडकरनगर। जिला मुख्यालय स्थित सदरपुर स्थित जिला चिकित्सालय एवं राजकीय मेडिकल कॉलेज, टांडा में मरीजों को बेहतर इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों की ओर मोड़ने का खेल खुलेआम चल रहा है। अस्पताल प्रशासन और निजी संस्थानों के बीच गठजोड़ के चलते मरीजों का शोषण हो रहा है, जबकि प्रशासन की ओर से कार्रवाई नाकाफी साबित हो रही है।
दलालों का सक्रिय नेटवर्क, एंबुलेंस तैनात
सूत्रों के अनुसार, जिला अस्पताल परिसर में निजी अस्पतालों की एंबुलेंसें लगातार तैनात रहती हैं। दलाल अस्पताल के वार्डों और ओपीडी में सक्रिय रहकर गंभीर मरीजों के परिजनों को भ्रमित करते हैं। वे सरकारी अस्पताल की सुविधाओं को कमतर बताकर निजी संस्थानों में इलाज कराने का दबाव बनाते हैं। मरीज के भर्ती होते ही दलाल एंबुलेंस की व्यवस्था कर देते हैं।
डॉक्टरों का निजी अस्पतालों से संबंध
आरोप है कि जिले के कई निजी अस्पतालों का सरकारी डॉक्टरों से सीधा तालमेल है। ये डॉक्टर सरकारी नौकरी के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी सेवाएं देते हैं। दलाल मरीजों को तुरंत जांच, बेहतर दवा और विशेष सुविधाओं का लालच देकर निजी अस्पतालों की ओर मोड़ते हैं। ओपीडी में डॉक्टरों के निजी सहायक भी इस प्रक्रिया में शामिल बताए जा रहे हैं।
प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल
लगभग छह महीने पहले तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमओ) ने दलालों की गतिविधियों को लेकर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, वर्तमान प्रभारी सीएमओ डॉ. पीएन यादव का दावा है कि अस्पताल में सुरक्षा गार्ड्स और पुलिस चौकी की निगरानी बढ़ाई गई है, जिससे दलालों की हरकतों में कमी आई है।
जनहित में सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने सरकारी अस्पताल की सुविधाओं में सुधार और दलाल प्रथा पर रोक की मांग की है। उनका कहना है कि अगर निजी अस्पतालों के एजेंट सरकारी संस्थानों में मरीजों को लूटने की साजिश रचेंगे, तो गरीबों को निःशुल्क इलाज का अधिकार छिन जाएगा। प्रशासन को इस मामले में तत्काल कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।








