तृणमूल कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी कलह

निष्कासित विधायकों की बैठक से सियासी हलचल तेज

  • पार्टी से निकाले गए दो विधायकों ने MLA हॉस्टल में की बैठक
  • कई टीएमसी विधायकों के शामिल होने का दावा, संगठन में बढ़ी बेचैनी
  • नेता प्रतिपक्ष चयन को लेकर असंतुष्ट गुट ने उठाए सवाल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। पार्टी से निष्कासित किए गए विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने सोमवार देर शाम विधायक हॉस्टल (MLA हॉस्टल) में एक बैठक आयोजित की, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस के कई विधायक शामिल हुए। दावा किया जा रहा है कि इनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी और लंबे समय से पार्टी से जुड़े कुछ विधायक भी मौजूद थे। बैठक में शामिल कुछ विधायक मालदा और मुर्शिदाबाद क्षेत्र से बताए जा रहे हैं।

50 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा

टीएमसी के निलंबित नेता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि पार्टी के 80 में से 50 से अधिक विधायक खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” बताने की तैयारी में हैं। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के संकेत जरूर मिले हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि असंतुष्ट गुट की सक्रियता बढ़ती है तो आगामी दिनों में पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

नेता प्रतिपक्ष चयन को लेकर विवाद

सूत्रों के अनुसार, असंतुष्ट गुट नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर भी नाराज है। संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया था कि नेता प्रतिपक्ष के चयन संबंधी प्रस्ताव में उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे, जिसे विधानसभा अध्यक्ष को भेजा गया था।

इन आरोपों के बाद पार्टी नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों विधायकों को संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। हालांकि, निष्कासन के बाद भी दोनों नेताओं की सक्रियता और विधायकों के साथ उनकी बैठक ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को और तेज कर दिया है।

प्रमुख बिंदु

  1. निष्कासित विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने MLA हॉस्टल में बैठक की।
  2. बैठक में कई टीएमसी विधायकों के शामिल होने का दावा।
  3. रिजू दत्ता ने 50 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा किया।
  4. नेता प्रतिपक्ष चयन को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा।
  5. फर्जी हस्ताक्षर के आरोप लगाने के बाद दोनों नेताओं को पार्टी से निकाला गया था।

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