
- सफर की शुरुआत के साथ शब्बेदारी का आयोजन
- मौलाना यासूब अब्बास ने पढ़ी जनाबे सकीना की मजलिस
- कर्बला के मसायब सुनकर रो पड़े अकीदतमंद
वाराणसी। मोहर्रम के बाद शुरू हुए इस्लामिक महीने सफर में शिया बहुल इलाकों में मजलिसों का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में मंगलवार को शहर के पठानी टोला स्थित मोहसिन मंजिल में अंजुमन सज्जादिया द्वारा शब्बेदारी का आयोजन किया गया। इस दौरान लखनऊ से आए प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु मौलाना मिर्जा यासूब अब्बास ने जनाबे सकीना की शहादत पर आधारित मजलिस को खेताब किया।
मौलाना यासूब अब्बास ने अपने बयान में कहा कि जब 10 मोहर्रम 61 हिजरी को कर्बला में इमाम हुसैन शहीद हुए, तो यजीद की सेना ने उनके घर की महिलाओं और बच्चों पर जुल्म किए। इमाम की चार साल की बेटी जनाबे सकीना को कैद कर शाम (सीरिया) ले जाया गया, जहां उन्हें जंजीरों में कैद किया गया और पानी से महरूम रखा गया।
मजदूरी और मातम से गूंज उठा माहौल
जनाबे सकीना की मसायब सुनकर मजलिस में मौजूद लोग फूट-फूट कर रोने लगे। मौलाना ने बताया कि सकीना को कैद में अपने बाबा की शहादत और भाई अली असगर की प्यास याद आती थी। अंततः वह सीरिया के उसी कैदखाने में दम तोड़ गईं। सुबह छह बजे से शहर की 10 से अधिक अंजुमनों ने नौहाख्वानी और मातम किया।
तुर्बत निकाली गई, सुबह 7 बजे समाप्त हुई शब्बेदारी
अंजुमन सज्जादिया ने सुबह तुर्बत निकाली। इसमें अंजुमन अजादारे हुसैनी, दोषीपुरा; अंजुमन हुसैनिया, चौहट्टा लाल खां; अंजुमन चरागे अली, कमालपुरा; अंजुमन हैदरी, चौक; अंजुमन सदा-ए-अब्बास, नक्खी घाट; अंजुमन जाफरिया, दोषीपुरा व कदीम बनारस; अंजुमन नासिरुल मोमनीन, मुकीमगंज सहित कई अंजुमनों ने हिस्सा लिया। सुबह 7 बजे तक मातम और नौहाख्वानी का यह दौर जारी रहा।








