अंबेडकरनगर। निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को आलापुर तहसील पहुंचकर उपजिलाधिकारी धर्मेंद्र कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, गृह सचिव और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को संबोधित था। इसमें निषाद वंश की विभिन्न उपजातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने समेत कई मांगें उठाई गईं।
जातिगत जनगणना में दर्ज करने की मांग
कार्यकर्ताओं ने कहा कि जातिगत जनगणना में मझवार, तुरैहा समेत निषाद वंश की पर्यायवाची जातियों को दर्ज किया जाए। उनका कहना है कि इससे समाज की वास्तविक संख्या सामने आ सकेगी।
ज्ञापन में उत्तर प्रदेश में निषाद वंश की सभी पर्यायवाची जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की मांग की गई। इसके साथ ही नौकरी और राजनीति में आरक्षण तथा पेंशन जैसी सुविधाएं देने की मांग भी रखी गई।
1952 में समाप्त हुआ था क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट
पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि अंग्रेजी शासन के दौरान क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत कई समुदायों को जन्मजात अपराधी घोषित किया गया था। भारत सरकार ने 31 अगस्त 1952 को इस कानून को समाप्त कर इन समुदायों को विमुक्त जाति घोषित किया था। इसी कारण 31 अगस्त को विमुक्त दिवस के रूप में मनाया जाता है।
निषाद पार्टी के अनुसार, 1931 की जनगणना में केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, मझवार, कश्यप, तुरैहा, माझी और रैकवार जैसी जातियों को एक ही वंश से जुड़ी पर्यायवाची जातियों के रूप में दर्ज किया गया था। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में एक ही वंश से जुड़ी जातियों को अलग-अलग आरक्षण व्यवस्था मिलने का मुद्दा भी उठाया।









