- 12 आरक्षित सीटों को लेकर जारी है विवाद
- PTI और JAAC ने चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया
- कई महीनों से प्रदर्शन, गिरफ्तारियां और हिंसा
इस्लामाबाद/मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सोमवार को विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान हो रहा है। चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब क्षेत्र में पिछले कई महीनों से विरोध प्रदर्शन, हिंसा, गिरफ्तारियां और सुरक्षा बलों की कार्रवाई जारी है।
12 आरक्षित सीटों पर विवाद
चुनावी विवाद उन 12 विधानसभा सीटों को लेकर है, जो भारतीय जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान जाकर बसे शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। इन्हीं सीटों को लेकर राजनीतिक दलों और प्रदर्शनकारी संगठनों ने सरकार के फैसले का विरोध किया है।
PTI और JAAC ने किया बहिष्कार
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI और आंदोलन का नेतृत्व कर रही जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने चुनाव के बहिष्कार का फैसला किया है। वहीं, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने PoK का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताई है।
प्रदर्शन के बाद बढ़ा तनाव
जेएएसी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन पर सरकार ने 5 जून से पहले प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद संगठन के कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुछ नेता भूमिगत हो गए। रावलाकोट समेत कई इलाकों में धरना-प्रदर्शन अब भी जारी हैं।
हिंसा और पाबंदियों से प्रभावित जनजीवन
प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में करीब 40 लोगों की मौत होने की खबर है। कई क्षेत्रों में सड़क जाम, धरने और सुरक्षा बंदोबस्त के कारण सामान्य जीवन प्रभावित हुआ। बैंक दो सप्ताह तक बंद रहे, जबकि कई इलाकों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं अब भी ठप हैं। पुंछ डिवीजन में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
सरकार का पक्ष
पाकिस्तान सरकार और अदालत का कहना है कि विवादित 12 आरक्षित सीटों को केवल संविधान में संशोधन करके ही समाप्त किया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव लगातार बना हुआ है।









