दिल्ली। दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने चार FIR दर्ज की हैं। सोमवार को विपक्षी नेताओं ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था। इस दौरान बैरिकेडिंग और प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन के आरोपों को लेकर पुलिस ने कार्रवाई की। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, FIR कनॉट प्लेस, तिलक मार्ग, बाराखंभा और मंदिर मार्ग थानों में दर्ज की गई हैं।
राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं को बुलाया
प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी ने मंगलवार शाम चार बजे विपक्षी नेताओं को अपने आवास पर हाई टी के लिए आमंत्रित किया। बैठक में SIR, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। INDIA ब्लॉक के नेताओं की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने की भी संभावना जताई गई है।
सोमवार को निकाले गए मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, अखिलेश यादव समेत 11 विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए थे। विपक्षी सांसदों ने SIR से जुड़ी कथित अनियमितताओं को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की 4 प्रमुख आपत्तियां
विपक्ष SIR की प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठा रहा है। इन सवालों के बीच द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज किए जाने की बात कही गई है।
1. SIR से जुड़े फैसलों पर आपत्ति
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी। उनका कहना था कि कुछ निर्णय उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए। इन आपत्तियों से आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
2. वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने का मामला
रिपोर्ट में मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, नाम हटाने और हटाए गए नामों को बहाल करने की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों का उल्लेख है। चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर के प्रबंधन को लेकर भी दोनों आयुक्तों ने चिंता जताई थी।
3. फॉर्म-6 में बदलाव पर सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, फॉर्म-6 में SIR से संबंधित सवाल जोड़ने के मामले में भी दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी। फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है।
4. चुनावी डेटा और काम के बंटवारे पर चिंता
रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों आयुक्तों ने चुनावी डेटा और मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर की निगरानी तथा पहुंच को लेकर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। काम के बंटवारे से जुड़े एक आदेश पर भी उन्होंने सवाल उठाए थे।
निर्वाचन आयोग ने क्या कहा था?
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने कहा था कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और अलग-अलग विचार निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग की इस प्रतिक्रिया के बीच विपक्ष SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही की मांग कर रहा है।
फिलहाल विवाद के केंद्र में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया, चुनावी डेटा के प्रबंधन और निर्वाचन आयोग के भीतर निर्णय लेने के तरीके को लेकर उठे सवाल हैं। विपक्ष इन मुद्दों की जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि निर्वाचन आयोग ने फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।









