सोनिया गांधी ने किताब में खोले निजी जिंदगी के पन्ने

बोलीं- मोदी और मेरी भारत को लेकर सोच अलग

  • सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को लॉन्च होगी
  • उन्होंने राजीव गांधी से रिश्ते, इंदिरा गांधी से मिली सीख और 2004 में PM पद ठुकराने पर बात की
  • मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में लोकतंत्र और संस्थाओं को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया

नई दिल्ली। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी अपनी नई किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ के जरिए पहली बार अपनी निजी जिंदगी, राजीव गांधी के साथ रिश्ते और भारतीय राजनीति में अपने लंबे सफर के कई अनछुए पहलुओं को सामने ला रही हैं। 10 नवंबर को प्रकाशित होने जा रही इस किताब में उन्होंने इटली से भारत आने, गांधी परिवार का हिस्सा बनने, राजीव गांधी से मुलाकात और बाद में सक्रिय राजनीति में आने तक के अनुभव साझा किए हैं।

किताब के प्रकाशन से पहले सोनिया गांधी ने ‘द हिंदू’ को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में अपने जीवन और राजनीतिक अनुभवों पर बात की। इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि भारत आने के बाद उनकी जिंदगी किस तरह बदली और इंदिरा गांधी तथा राजीव गांधी से उन्हें क्या सीखने को मिला। बातचीत में 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले, इमरजेंसी, कांग्रेस की मौजूदा स्थिति और भाजपा-आरएसएस की राजनीति पर भी उनकी राय सामने आई है। <Cite refs={[“turn712846search0″,”turn712846search7”]}/>

‘राजीव से मुलाकात के 60 साल बाद भी मैं वही इंसान हूं’

सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में राजीव गांधी के साथ अपने रिश्ते और भारत में बिताए जीवन को याद किया। उन्होंने कहा कि राजीव से मुलाकात के करीब 60 साल बाद भी उनके व्यक्तित्व में मूल रूप से ज्यादा बदलाव नहीं आया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि पहले की तुलना में अब वह उतना हंसती और मुस्कुराती नहीं हैं।

किताब में उन्होंने अपने रिश्ते को केवल दो लोगों की प्रेम कहानी तक सीमित नहीं बताया है। उनके मुताबिक, यह राजीव गांधी के परिवार और उस देश से जुड़ाव की भी कहानी है, जिसे उन्होंने धीरे-धीरे अपना घर और अपनी पहचान बनाया।

सोनिया ने बताया कि जब वह एक युवा दुल्हन के रूप में भारत आई थीं, तब उन्हें देश के बारे में बहुत कम जानकारी थी। यहां आने के बाद उन्होंने राजीव गांधी और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से बहुत कुछ सीखा। उनके अनुसार, दोनों का साहस, संवेदनशीलता, कर्तव्य के प्रति समर्पण और धर्मनिरपेक्ष तथा लोकतांत्रिक भारत में विश्वास उनके जीवन को प्रभावित करने वाले प्रमुख मूल्य रहे।

इटली से भारत तक का सफर, परिवार और देश से जुड़ाव का जिक्र

‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ में सोनिया गांधी ने अपने बचपन और भारत आने के बाद के अनुभवों को भी जगह दी है। किताब में इटली में बीते शुरुआती जीवन से लेकर कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से मुलाकात, शादी और भारतीय संस्कृति में ढलने तक की यात्रा शामिल है।

उन्होंने बताया कि भारत में शुरुआती दिनों में उन्हें यहां के रहन-सहन, खानपान और भाषा को समझना पड़ा। धीरे-धीरे उन्होंने भारतीय परिवार और समाज के बीच अपनी जगह बनाई। किताब में राजीव गांधी के साथ उनके निजी जीवन के अलावा गांधी परिवार से जुड़े बड़े घटनाक्रमों और उन घटनाओं का भी जिक्र है, जिन्होंने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

सोनिया गांधी के मुताबिक, परिवार और दोस्तों के प्रति वफादारी, दूसरों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी निभाने जैसे मूल्य उनके व्यक्तित्व का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं मूल्यों को उन्होंने अपने जीवन में बनाए रखने की कोशिश की है।

2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने के फैसले पर भी चर्चा

सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले पर भी बात की। उस चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को जीत मिली थी और सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री पद का स्वाभाविक दावेदार माना जा रहा था। हालांकि, उन्होंने यह पद स्वीकार नहीं किया और बाद में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

इस फैसले पर पूछे गए सवाल के जवाब में सोनिया गांधी ने कहा कि उन्हें इस बात का कोई पछतावा नहीं है कि उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार और पार्टी की जिम्मेदारियां अलग-अलग थीं। मनमोहन सिंह सरकार का नेतृत्व कर रहे थे और वह पार्टी की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

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