
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट (KOHUR) को बताया कि मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह से जुड़े वायरल ऑडियो क्लिप में छेड़छाड़ की गई थी।
मुख्य बातें:
- जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी की गोपनीय रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि ऑडियो क्लिप में एडिटिंग की गई थी और यह वैज्ञानिक रूप से आवाज की पुष्टि के लिए फिट नहीं थी।
- याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने दावा किया कि प्राइवेट फोरेंसिक संस्था ट्रुथ लैब्स की रिपोर्ट में ऑडियो की आवाज 93% तक बीरेन सिंह से मेल खाती थी और उसमें कोई कट या एडिटिंग नहीं पाई गई।
- कोर्ट ने दोनों पक्षों को रिपोर्ट साझा करने और दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
पृष्ठभूमि:
मणिपुर में 3 मई 2023 को कुकी और मैतेई समुदाय के बीच हिंसा शुरू हुई थी। दो साल तक चली हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे गए। दिसंबर 2024 में एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें कथित तौर पर बीरेन सिंह को मैतेई समुदाय को हिंसा भड़काने की अनुमति देते हुए सुना गया।
KOHUR ने फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ऑडियो क्लिप की जांच की मांग की थी। मणिपुर सरकार ने कहा कि ऑडियो क्लिप में छेड़छाड़ की गई है और इसे फैलाकर राज्य में जातीय हिंसा भड़काने की साजिश की जा रही थी।
बीरेन सिंह का इस्तीफा:
मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया, जिसे फरवरी 2026 तक बढ़ा दिया गया।








