वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर एक बार फिर नाराजगी जताई है। शुक्रवार को न्यूयॉर्क के सिरैक्यूज में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें पुरस्कार न देकर नॉर्वे ने अपने ऊपर ऐसा दाग लगा लिया है, जो कभी नहीं मिटेगा। ट्रम्प ने इस फैसले को शर्मनाक और अपमानजनक बताते हुए दावा किया कि युद्ध रोकने के उनके प्रयासों के लिए उन्हें आठ बार नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था।
नवी पिल्लै को पुरस्कार मिलने पर ट्रम्प ने उठाए सवाल
इस साल नोबेल शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका की न्यायविद और संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख नवी पिल्लै को दिया गया है। नोबेल समिति ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया है।
ट्रम्प ने पुरस्कार के फैसले पर टिप्पणी करते हुए पिल्लै को ऐसा व्यक्ति बताया, जिसके बारे में उनके मुताबिक बहुत कम लोग जानते हैं। उन्होंने पुरस्कार को उदारवादी विचारों से जुड़ा फैसला बताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।
भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाने का फिर किया दावा
ट्रम्प ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाने में भूमिका निभाई थी। उनके मुताबिक, दोनों परमाणु हथियार संपन्न देशों को युद्ध से रोककर उन्होंने पांच करोड़ लोगों की जान बचाई। उन्होंने ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी जिक्र किया।
ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका। उनका कहना था कि ऐसा नहीं होता तो मध्य पूर्व के साथ यूरोप और अमेरिका तक गंभीर संकट फैल सकता था। ये ट्रम्प के अपने दावे हैं; इनके प्रभाव और परिणामों का आकलन स्वतंत्र साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
अमेरिका को पुरस्कार न मिलने पर भी जताई नाराजगी
ट्रम्प ने कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार अमेरिका को मिलना चाहिए था। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अमेरिका इस फैसले को नहीं भूलेगा। ट्रम्प लंबे समय से अपने विदेश नीति संबंधी प्रयासों को नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य बताते रहे हैं।
2018 से नोबेल पुरस्कार का जिक्र करते रहे हैं ट्रम्प
नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रम्प की दिलचस्पी नई नहीं है। अक्टूबर 2018 में उन्होंने कहा था कि उत्तर कोरिया और सीरिया से जुड़े मुद्दों पर शांति स्थापित करने के प्रयासों के बावजूद उन्हें शायद यह पुरस्कार नहीं मिलेगा।
फरवरी 2019 में ट्रम्प ने कहा था कि जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था। उन्होंने यह भी संदेह जताया था कि उन्हें कभी यह सम्मान मिल पाएगा या नहीं।
2019 में एक पाकिस्तानी पत्रकार से बातचीत के दौरान भी ट्रम्प ने कहा था कि निष्पक्ष तरीके से पुरस्कार दिए जाने पर उन्हें कई उपलब्धियों के लिए नोबेल मिल सकता है। 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को मिले नोबेल शांति पुरस्कार का जिक्र करते हुए अपनी दावेदारी की तुलना उनसे की थी।
इस बार नवी पिल्लै को पुरस्कार मिलने के बाद ट्रम्प की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार और उनकी विदेश नीति संबंधी उपलब्धियों को लेकर बहस छेड़ दी है।









