लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ से जनजीवन प्रभावित है। राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी भर गया है। फैजुल्लागंज की कई कॉलोनियों में घरों और सड़कों तक पानी पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई जगहों पर आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं, गोंडा में घाघरा नदी के उफान और लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के कटान से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
लखनऊ में बाढ़ से बिगड़े हालात, फैजुल्लागंज में घरों तक पानी
राजधानी के फैजुल्लागंज समेत गोमती नदी के आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। जलभराव के कारण कई सड़कों पर आवागमन बाधित हुआ है। कुछ स्थानों पर घरों के बाहर खड़ी कारें पानी में डूब गई हैं। प्रभावित परिवारों को घरों से निकलने, जरूरी सामान सुरक्षित रखने और दैनिक जरूरतें पूरी करने में परेशानी हो रही है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गोमती में बढ़े पानी के कारण लखनऊ के करीब 40 हजार घर प्रभावित हुए हैं। बाढ़ का असर आवासीय इलाकों के साथ सार्वजनिक स्थानों और बुनियादी सुविधाओं पर भी पड़ा है। राहत एवं बचाव के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। <Cite refs={[“turn639116news24″,”turn639116search12”]}/>
गोमती रिवर फ्रंट बंद, निचले इलाकों पर नजर
गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बीच नदी के आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बरती जा रही है। दी गई जानकारी के मुताबिक, गोमती रिवर फ्रंट को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। नदी के किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की जरूरत है।
गोंडा के आठ गांवों में घुसा पानी
गोंडा में घाघरा नदी के उफान से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक, आठ गांवों में पानी घुस गया है और सात हजार से अधिक लोग प्रभावित हैं। गांवों में पानी भरने से लोगों के सामने सुरक्षित स्थान तक पहुंचने, भोजन-पानी और जरूरी सामान की व्यवस्था करने जैसी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
प्रभावित इलाकों में प्रशासन की निगरानी और जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाना अहम है। नदी के जलस्तर और गांवों में पानी की स्थिति के अनुसार लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का कटान, घर और मंदिर बहे
लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के कटान से नदी किनारे बसे इलाकों को नुकसान पहुंचने की खबर है। दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक 13 घर और चार मंदिर नदी में समा चुके हैं। कटान के कारण प्रभावित परिवारों के सामने रहने की जगह और संपत्ति बचाने की चुनौती है।
नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि वे कटान वाले हिस्सों से दूरी बनाए रखें और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें।









