वाराणसी रोप-वे के दूसरे चरण का ट्रायल शुरू

गंडोलों की सुरक्षा जांच के लिए होगी लोड टेस्टिंग

  • रथयात्रा-गोदौलिया रूट पर लक्सा के टावर-26 तक तारों के एलाइनमेंट की जांच
  • 15 नवंबर से गोदौलिया तक ट्रायल बढ़ाने की तैयारी

वाराणसी। शहर में यातायात का दबाव कम करने और आवागमन को सुगम बनाने के लिए निर्माणाधीन रोप-वे परियोजना के दूसरे चरण का परीक्षण शुरू हो गया है। रथयात्रा से गोदौलिया के बीच लक्सा स्थित टावर-26 तक गंडोलों के तारों के एलाइनमेंट की प्रारंभिक जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जल्द ही इस परीक्षण का विस्तार गोदौलिया तक किया जाएगा।

नेशनल हाइवेज लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) के अधिकारियों ने बताया कि तारों के एलाइनमेंट का ट्रायल करीब एक महीने तक चलेगा। इसके बाद रोप-वे की क्षमता और सुरक्षा मानकों की जांच के लिए लोड टेस्टिंग की जाएगी। दूसरे चरण में अब तक परीक्षण के दौरान कोई शिकायत सामने नहीं आई है।

15 नवंबर से गोदौलिया तक ट्रायल की तैयारी

अधिकारियों के अनुसार, 15 नवंबर से गोदौलिया तक तारों के एलाइनमेंट का परीक्षण शुरू करने की तैयारी है। इस प्रक्रिया में गंडोलों के तारों की स्थिति और उनके संरेखण की जांच की जाएगी, ताकि आगे की तकनीकी जांच निर्धारित मानकों के अनुसार की जा सके।

एलाइनमेंट का परीक्षण पूरा होने के बाद गंडोलों पर निर्धारित वजन रखकर उनकी भार उठाने की क्षमता जांची जाएगी। इस चरण में रोप-वे से जुड़ी तकनीकी व्यवस्था के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।

बालू की बोरियों से होगी लोड टेस्टिंग

लोड टेस्टिंग के दौरान प्रत्येक गंडोले में अधिकतम 80 किलोग्राम वजन की बालू की बोरी रखकर परीक्षण करने की योजना है। इससे यह जांचा जाएगा कि गंडोला, तार और संबंधित तकनीकी व्यवस्था निर्धारित भार के साथ सही ढंग से काम कर रहे हैं या नहीं।

इसके बाद अगले महीने से परियोजना से जुड़े कर्मचारियों को डमी यात्रियों के रूप में गंडोलों में बैठाकर भी वजन परीक्षण किए जाने की तैयारी है। इस दौरान सुरक्षा और संचालन से जुड़े निर्धारित मानकों की जांच की जाएगी।

पहले चरण में कैंट से रथयात्रा तक जांच पूरी

रोप-वे परियोजना के पहले चरण में कैंट से रथयात्रा के बीच निर्धारित मानकों की जांच पूरी हो चुकी है। अब दूसरे चरण में रथयात्रा से गोदौलिया के बीच परीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

एलाइनमेंट और लोड टेस्टिंग सहित जरूरी तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही परियोजना के अगले चरण की प्रक्रिया तय होगी। रोप-वे शुरू होने पर शहर में यातायात का दबाव कम करने और लोगों के आवागमन को सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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