क्यों दीपांजलि मौर्य की हत्या ने पूरे गांव को हिला दिया

  • दीपांजलि मौर्य की हत्या: गांव में तनाव और आक्रोश का माहौल

  • हंसवर में दरिंदगी: एक मासूम बेटी के सपनों को मौत ने चुराया

  • पुलिस की त्वरित कार्रवाई: आरोपी गिरफ्तारी के लिए चार विशेष टीमें गठित

 अंबेडकरनगर।  एक तरफ जहां बेटियों के सपनों को हकीकत में बदलने के लिए समाज संघर्ष करता है, वहीं दूसरी ओर एक और दरिंदगी की घटना ने उस संघर्ष को चुपके से समाप्त कर दिया। हंसवर क्षेत्र के एक छोटे से गांव में 22 वर्षीय दीपांजलि मौर्य की हत्या ने न केवल एक मासूम बेटी की असामयिक मृत्यु का कारण बनी, बल्कि समाज की उस असुरक्षित सच्चाई को उजागर कर दिया है, जिससे हर बेटी डर सकती है।

दीपांजलि का संघर्ष, सपना और असामयिक हत्या

नरकटा बैरागपुर गांव की निवासी, 22 वर्षीय दीपांजलि मौर्य, जो स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय प्रीतमपुर नारायणपुर में बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा थी, घर के कामों के साथ अपनी पढ़ाई में भी अव्‍वल थी। बृहस्पतिवार की रात करीब 8:15 बजे दीपांजलि दूध लेने घर से बाहर निकली थी, लेकिन वापस घर न लौट सकी। गांव की वही गली, जहां कभी उसकी चहचहाहट गूंजती थी, अब एक दर्दनाक मंजर बन चुकी थी, जब उसकी लाश वहां पाई गई।

दुखद घटना का खुलासा

दीपांजलि को गांव के हरिराम मौर्य के घर दूध लेने जाते समय दो युवकों ने घेर लिया। मुंह दबाकर, खेत की ओर खींचकर, एक गोली से उसकी जान ले ली गई। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। गोली की आवाज सुनकर गांव में कोहराम मच गया, और लोग दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मृतक के पिता पारस नाथ मौर्य की आंखों में गूंगी चीखें थीं, और मां की रुलाई ने आकाश को चीर दिया। भाई सूर्यमणि मौर्य ने हत्या का आरोप संदीप यादव और खुशीराम मौर्य पर लगाया।

गुस्से और आक्रोश की चिंगारी

घटना के बाद, परिजनों ने शव को पुलिस को सौंपने से मना कर दिया। उनका सवाल था, “क्या अब बेटियां भी घर से बाहर निकलने में डरेंगी?” पूरी घटना ने गांव में रोष का माहौल बना दिया। परिजनों का गुस्सा शांत करने के लिए पुलिस अधिकारियों ने बहुत प्रयास किए, लेकिन गुस्से और आक्रोश को शांत करना मुश्किल हो गया।

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