लखनऊ। शहर में सर्दी के बढ़ते तेवरों के साथ ही वायु प्रदूषण ने भी खतरे की घंटी बजा दी है। दीपावली से एक दिन पहले लखनऊ का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ऑरेंज जोन में पहुंच गया है, जो स्वास्थ्य के लिए सावधानी बरतने का संकेत है। खासकर लालबाग और तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि दीपावली के बाद यह स्तर और भी बढ़ सकता है, जिससे लोगों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
मौसम में गुलाबी ठंड का असर, दिन में तेज धूप
रविवार को सुबह से तेज और चटक धूप के बीच मौसम साफ रहा। मौसम विभाग ने बताया कि राजधानी का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री के करीब रहेगा। सुबह और शाम के वक्त ठंड का प्रभाव महसूस किया जा रहा है, जिसे स्थानीय लोग ‘गुलाबी ठंड’ के नाम से जानते हैं। यह स्थिति तापमान में गिरावट और हवाओं की धीमी गति के कारण होती है, जो वायु प्रदूषण को कम फैलने देती है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक में खराबी, लालबाग-तालकटोरा क्षेत्र में हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित
लखनऊ के 6 प्रमुख मॉनिटरिंग स्टेशनों पर रविवार को वायु गुणवत्ता का औसत AQI 148 दर्ज हुआ, जो यलो जोन में आता है। हालांकि, लालबाग और तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है। लालबाग में AQI 209 और तालकटोरा में 206 रिकॉर्ड किया गया है, जो कि स्वास्थ्य के लिहाज से चिंता का विषय है। वहीं अलीगंज का AQI 130, अंबेडकर यूनिवर्सिटी 128, कुकरैल 114 और गोमतीनगर 104 है, जो यलो जोन के दायरे में आते हैं।
वायु प्रदूषण के इस स्तर में पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म और हानिकारक कणों की अधिकता मुख्य कारण मानी जा रही है। ये कण सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर गंभीर श्वसन और हृदय रोगों का कारण बन सकते हैं।
पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार की स्थिति
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कई सालों में दीपावली के ठीक बाद लखनऊ में वायु प्रदूषण में भारी वृद्धि देखी गई है। उदाहरण के लिए,
2024 की दीपावली (31 अक्टूबर) को AQI 182 था, जबकि अगले दिन 1 नवंबर को यह बढ़कर 306 हो गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है।
2023 में दीपावली के दिन AQI 126 था, जो अगले दिन बढ़कर 213 पहुंच गया।
2022 और 2021 में भी दीपावली के बाद प्रदूषण स्तर में इसी तरह का तेज उछाल देखा गया।
इन वर्षों के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि दीपावली के दौरान पटाखों, वाहनों और अन्य प्रदूषण स्रोतों के कारण वायु प्रदूषण चरम पर पहुंच जाता है, जिससे सांस संबंधी बीमारियां बढ़ जाती हैं।









