लखनऊ। लखनऊ में सोमवार को 68500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव कर नारेबाजी की। मौके पर पहुंची पुलिस ने अभ्यर्थियों को हटाने की कोशिश की और उन्हें हिरासत में लेना शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। इसी बीच मनोज नाम के एक अभ्यर्थी की तबीयत बिगड़ गई।
पुलिस पर अभद्रता और कपड़े फाड़ने का आरोप
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने ‘ऐसी क्या मजबूरी है, आरक्षण की चोरी है’ और ‘पिछड़ा आयोग ने माना है, आरक्षण घोटाला है’ जैसे नारे लगाए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाने का प्रयास किया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्रता की और कुछ प्रदर्शनकारियों के कपड़े फाड़ दिए। प्रदर्शनकारियों को पुलिसकर्मी उठाकर वहां से ले गए। इन आरोपों पर पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है।
नियुक्ति की मांग पर अड़े अभ्यर्थी
प्रदर्शन में शामिल तूफान सिंह ने बताया कि 10 सितंबर को अभ्यर्थियों की मुलाकात बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी से हुई थी। बैठक में दोनों विभागों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
तूफान सिंह के मुताबिक, बैठक के दौरान मंत्रियों और अधिकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी होने की बात स्वीकार की थी। उन्होंने दावा किया कि राज्य और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के स्तर पर भी आरक्षण से जुड़ी अनियमितताओं का मामला उठाया गया है। अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब उनकी शिकायतों पर विचार हो चुका है, तो उन्हें अब तक नियुक्ति क्यों नहीं दी गई।
आरक्षण से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई की मांग
68500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी आरक्षण संबंधी कथित अनियमितताओं और नियुक्ति की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को अब तक राहत नहीं मिली है।
हालांकि, मंत्रियों और अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर घोटाला स्वीकार किए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। भर्ती प्रक्रिया, आरक्षण संबंधी शिकायतों और आयोगों के निष्कर्षों पर आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।









