- 15 दिनों में 5 लाख रुपए के कैप्सूल जब्त
- दर्द और नसों की बीमारी की दवाओं का हो रहा दुरुपयोग
- बाजार से गायब दवाओं की सप्लाई पर उठे सवाल
लखनऊ। करोड़ों रुपए के कोडीन सिरप रैकेट का खुलासा होने के बाद राजधानी लखनऊ में नशे का नया तरीका सामने आया है। युवाओं के बीच अब कथित तौर पर ‘नीले कैप्सूल’ का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की पिछले 15 दिनों की कार्रवाई में करीब 5 लाख रुपए कीमत के संदिग्ध नशीले कैप्सूल जब्त किए गए हैं।
इलाज की दवाओं का हो रहा दुरुपयोग
जांच में सामने आया है कि जिन दवाओं का उपयोग डॉक्टर दर्द, नसों से जुड़ी बीमारियों और मिर्गी जैसे रोगों के इलाज में करते हैं, उनका कथित तौर पर नशे के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। इनमें स्पाजमो प्रॉक्सीवान (Spasmo Proxyvon), प्रिगाबालिन (Pregabalin), गैबापेंटिन (Gabapentin) और ट्रामाडोल (Tramadol) जैसी दवाएं शामिल हैं।
सप्लाई पर उठे सवाल
दवा कारोबारियों का कहना है कि स्पाजमो प्रॉक्सीवान लंबे समय से सामान्य बाजार में उपलब्ध नहीं थी, लेकिन हाल के दिनों में इसकी सप्लाई दोबारा शुरू होने की चर्चा है। एफएसडीए की कार्रवाई में जिन स्थानों से ये कैप्सूल बरामद हुए हैं, उसने दवा कारोबारियों को भी हैरान कर दिया है।
जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ये दवाएं प्रतिबंधित या नियंत्रित श्रेणी में हैं, तो इनकी अवैध सप्लाई कौन कर रहा है। एफएसडीए इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटा है और सप्लाई चेन की पड़ताल की जा रही है।









