- अप्रैल-जून में तेल कंपनियों का रिकॉर्ड मुनाफा
- कच्चा तेल 70 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा
- यमन, ईरान और अमेरिका से जुड़े घटनाक्रमों पर दुनिया की नजर
वॉशिंगटन। ईरान-इजराइल युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर भी देखने को मिला। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के बीच दुनिया की छह सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने रिकॉर्ड 81 अरब डॉलर (करीब 7 लाख करोड़ रुपये) का मुनाफा कमाया। यह राशि भारत के वार्षिक रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक बताई गई है।
युद्ध शुरू होने के समय कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अप्रैल से जून के दौरान बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इससे तेल कंपनियों के मुनाफे में करीब 23% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इसी बीच यमन के लाल सागर में भारतीय ध्वज वाले कारोबारी जहाज एमएसवी फैजे नूर-ए-औलिया पर हमला हुआ। हमले के बाद जहाज डूब गया, हालांकि उस पर सवार सभी 13 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया।
उधर, ईरान में विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ कुछ सांसद महाभियोग लाने की तैयारी कर रहे हैं। उन पर अमेरिका के साथ बातचीत और संभावित समझौते के जरिए देश के हितों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
वहीं, इजराइली चैनल-14 की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की शक्तियां सीमित कर दी गई हैं। दावा किया गया है कि सुरक्षा, विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम जैसे रणनीतिक मामलों में अब IRGC कमांडर अहमद वाहिदी की राय को प्राथमिकता दी जाएगी।









