रोम। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। उन्होंने रविवार को कहा कि इस संबंध में कैबिनेट जल्द ही प्रस्ताव पर फैसला ले सकती है। मेलोनी के मुताबिक स्कूलों में छात्रों का चेहरा ढका हुआ नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति पर परंपरा या सामाजिक दबाव के नाम पर चेहरा ढकने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
विदेशी छात्रों को लेकर भी नियम प्रस्तावित
मेलोनी सरकार स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या और उनके एकीकरण को लेकर भी नए नियमों पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक ऐसे विदेशी छात्रों के माता-पिता को इटैलियन भाषा सीखनी पड़ सकती है, जिनके बच्चों को स्कूल में घुलने-मिलने और इटली की शिक्षा व्यवस्था में शामिल होने में परेशानी हो रही है। सरकार का जोर विदेशी छात्रों के शैक्षणिक और सामाजिक एकीकरण पर बताया जा रहा है।
1975 से मौजूद है चेहरा ढकने को लेकर कानून
इटली में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा इस तरह ढकने को लेकर 1975 से कानून लागू है, जिससे किसी व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो जाए। हालांकि कानून में कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट का प्रावधान है। 2008 में एक अदालत के फैसले में भी कहा गया था कि धार्मिक या सांस्कृतिक कारण से चेहरा ढकने के मामले में केवल इसी आधार पर कानून का उल्लंघन तय नहीं किया जा सकता, बल्कि मामले की परिस्थितियों को भी देखा जाना चाहिए।
अब स्कूलों के लिए अलग प्रतिबंध की तैयारी
मेलोनी सरकार अब स्कूलों में बुर्का और नकाब को लेकर अलग नियम लागू करने की तैयारी कर रही है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्ताव को कानून बनाने के लिए संसद के सामने रखा जाएगा। प्रस्ताव को कानून का रूप देने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी।
इमिग्रेशन बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
इटली में इमिग्रेशन यानी दूसरे देशों से आने वाले लोगों का मुद्दा पहले से ही राजनीतिक बहस के केंद्र में है। 2027 में होने वाले आम चुनाव से पहले यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो सकता है। मेलोनी की पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली (FdI) को नेशनल फ्यूचर (FN) जैसी पार्टियों से चुनौती मिल रही है, जो इमिग्रेशन को लेकर और सख्त नीतियों की मांग करती हैं।
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FN पहले ही उठा चुकी है बुर्का-नकाब का मुद्दा
नेशनल फ्यूचर ने जुलाई में ही स्कूलों में बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। ऐसे में मेलोनी सरकार की प्रस्तावित पहल को इटली में चल रही इमिग्रेशन और सांस्कृतिक एकीकरण से जुड़ी राजनीतिक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि प्रस्ताव को कानून बनने के लिए आगे की संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया से गुजरना होगा।









